UP News : अयोध्या के राम मंदिर में खुलेंगे उप मंदिर, नए पुजारियों की भी होगी भर्ती
अयोध्या राम मंदिर में भक्तों की बढ़ती संख्या और कुछ नए उप-मंदिरों के खुलने के कारण, कुछ नए पुजारियों की नियुक्ति की जाएगी।
राम जन्मभूमि परिसर में व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल की जा रही है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और पूजा-पाठ की विस्तृत होती जिम्मेदारियों को देखते हुए राम मंदिर में जल्द ही लगभग 50 नए पुजारियों की नियुक्ति की योजना बनाई गई है। संभावना है कि यह भर्ती प्रक्रिया परिसर में स्थित उप-मंदिरों में नियमित दर्शन व्यवस्था शुरू होने से पहले पूरी कर ली जाएगी, ताकि पूजा-अर्चना और दर्शन व्यवस्था बिना किसी व्यवधान के सुचारु रूप से संचालित हो सके।
बढ़ता धार्मिक दायित्वों का दबाव
बताया जा रहा है कि मंदिर प्रशासन को लगातार यह अनुभव हो रहा है कि वर्तमान व्यवस्था पर बढ़ते धार्मिक दायित्वों का दबाव बढ़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त पुजारियों की आवश्यकता महसूस की गई है। प्रस्तावित भर्ती के तहत ऐसे पुजारियों का चयन किया जाएगा जो वैदिक परंपराओं में निपुण हों और राम मंदिर की धार्मिक मर्यादाओं, नियमों एवं परंपराओं का गहन ज्ञान रखते हों।
वर्तमान समय में 20 पुजारी कार्यरत
वर्तमान समय में राम मंदिर में कुल 20 पुजारी कार्यरत हैं, जिन पर रामलला और राम दरबार के साथ-साथ शेषावतार, परकोटे के छह मंदिरों, यज्ञमंडप, सप्त मंडपम तथा कुबेर टीला स्थित कुबेरेश्वर महादेव मंदिर की पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी है। इन सभी स्थलों पर नियमित और विधिवत पूजा संपन्न कराना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
सेवा देने के लिए 42 पुजारियों की जरूरत
राम मंदिर और राम दरबार के अतिरिक्त सात उप-मंदिरों में प्रतिदिन दर्शन व्यवस्था शुरू करने के लिए तीन शिफ्टों में पुजारियों की तैनाती आवश्यक मानी जा रही है। सुबह और शाम की दोनों पालियों में आठ-आठ घंटे या उससे अधिक समय तक सेवा देने के लिए कुल 42 पुजारियों की जरूरत आंकी गई है।
वहीं सप्त मंडपम और कुबेर टीला में सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक निरंतर पूजा-पाठ के लिए आठ अतिरिक्त पुजारियों की आवश्यकता होगी। इस प्रकार कुल मिलाकर कम से कम 50 नए पुजारियों की तत्काल जरूरत बताई जा रही है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि इन नियुक्तियों के बाद न केवल पूजा-व्यवस्था और अधिक सुव्यवस्थित होगी, बल्कि श्रद्धालुओं को भी दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों में बेहतर सुविधा मिल सकेगी।
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