Jharkhand में नक्सलियों पर भारी पड़े जवान…पूरी टोली घेर बरसाई गोलियां, 36 घंटे में 21 ढेर
झारखंड के सारंडा जंगल में 36 घंटे चले एनकाउंटर में 21 माओवादी मारे गए, जिनमें कमांडर 'अनिल दा' भी शामिल था, जिस पर कई लाख रुपये का इनाम था। सुरक्षा बलों के इस बड़े ऑपरेशन को माओवादी विद्रोह के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से सामने आई एक बड़ी कार्रवाई ने नक्सल नेटवर्क को गहरा झटका दिया है। देश के सबसे दुर्गम और घने जंगलों में गिने जाने वाले सारंडा क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने बीते 36 घंटों के भीतर नक्सलियों के सबसे मजबूत गढ़ को नेस्तनाबूद कर दिया। इस व्यापक अभियान में अब तक 21 कुख्यात नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जिनमें संगठन का शीर्ष कमांडर और करोड़ों रुपये का इनामी नेता भी शामिल है।
इस अभियान ने न केवल नक्सलियों की सैन्य क्षमता को तोड़ा है, बल्कि उनके मनोबल को भी गहरी चोट पहुंचाई है। जिस इलाके को नक्सली वर्षों से अभेद्य मानते थे, वहीं सुरक्षाबलों ने उन्हें संभलने तक का मौका नहीं दिया।
सुरक्षा बलों की रणनीति और अनल दा का खात्मा
इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है पतिराम मांझी उर्फ अनल दा का मारा जाना। अनल दा नक्सली संगठन का एक प्रमुख रणनीतिकार और सबसे खतरनाक चेहरों में से एक था। उस पर झारखंड सरकार की ओर से 1 करोड़ रुपये, ओडिशा सरकार द्वारा 1.2 करोड़ रुपये और एनआईए की तरफ से 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इस तरह कुल इनामी राशि 2 करोड़ 35 लाख रुपये तक पहुंच चुकी थी।
खुफिया इनपुट के आधार पर सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने इलाके को चारों ओर से घेरते हुए सुनियोजित कार्रवाई की। अनल दा अपने लगभग 25 सशस्त्र साथियों के साथ जंगल में मौजूद था, लेकिन सुरक्षाबलों की घेराबंदी में वह पूरी तरह फंस गया। गुरुवार को 15 नक्सली ढेर किए गए, जबकि शुक्रवार सुबह छह और शव बरामद हुए।
36 घंटे तक चला ऑपरेशन
गुरुवार से शुरू हुआ यह अभियान लगातार 36 घंटों तक चला। जैसे ही सुरक्षाबलों ने जंगल के भीतर प्रवेश किया, पहले से मोर्चा संभाले नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। हालांकि जवान पूरी तैयारी के साथ थे और तुरंत जवाबी कार्रवाई की गई।
घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सुरक्षाबलों ने इलाके पर अपनी पकड़ बनाए रखी। लगातार गोलीबारी के बीच पूरे क्षेत्र को सील कर दिया गया ताकि किसी भी नक्सली को भागने का मौका न मिले। इस दौरान अनल दा समेत उसके कोर ग्रुप के लगभग सभी लड़ाके मारे गए।
नक्सल नेटवर्क को लगा झटका
वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, अनल दा का मारा जाना झारखंड और आसपास के राज्यों में नक्सलवाद के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। वह न सिर्फ हमलों की योजना बनाता था, बल्कि संगठन के लिए नई भर्तियों और सप्लाई नेटवर्क की कमान भी संभालता था।
मुठभेड़ स्थल से बड़ी मात्रा में हथियार, विस्फोटक और रोजमर्रा के इस्तेमाल का सामान बरामद किया गया है। फिलहाल पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है, क्योंकि आशंका जताई जा रही है कि कुछ नक्सली घायल अवस्था में जंगल के भीतर छिपे हो सकते हैं।
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