भारत-पाकिस्तान के बीच कैदियों और मछुआरों की लिस्ट का आदान-प्रदान, 2008 के समझौते के तहत हुई प्रक्रिया
भारत और पाकिस्तान ने गुरुवार को एक-दूसरे की जेलों में बंद नागरिक कैदियों और मछुआरों की सूची का आदान-प्रदान किया। यह प्रक्रिया नई दिल्ली और इस्लामाबाद में राजनायिक चैनलों के माध्यम से की गई।
भारत और पाकिस्तान ने गुरुवार को एक-दूसरे की जेलों में बंद नागरिक कैदियों और मछुआरों की सूची का आदान-प्रदान किया। यह प्रक्रिया नई दिल्ली और इस्लामाबाद में राजनायिक चैनलों के माध्यम से की गई। विदेश मंत्रायल ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह अदला-बदली साल 2008 में हुए द्विपक्षीय कांसुलर एक्सेस समझौते के तहत की गई है। इस समझौते के अनुसार, हर वर्ष 1 जनवरी और 1 जुलाई को दोनों देश एक-दूसरे की कैदियों और मछुआरों की सूची साझा करते हैं।
दोनों देशों ने जारी की कैदियों की सूची
भारत ने अपनी हिरासत में बंद 391 नागरिक कैदियों और 33 पाकिस्तानी मछुआरों की सूची पाकिस्तान को सौंपी है। वहीं, पाकिस्तान ने अपनी जेलों में बंद 58 भारतीय नगारिक कैदियों और 199 भारतीय मछुआरों की सूची भारत को दी है।
भारत ने की जल्द रिहाई की मांग
भारत सरकार ने पाकिस्तान से अनुरोध किया है कि वह अपनी हिरासत में रखे गए सभी भारतीय नागरिकों और मछुआरों को जल्द रिहा करे और सुरक्षित भारत वापसी सुनिश्चित करे। इसके अलावा भारत ने विशेष रूप से उन 167 भारतीय कैदियों और मछुआरों की रिहाई की मांग की है, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है, लेकिन अब तक वापस नहीं भेजे गए हैं।
कांसुलर एक्सेस और सुरक्षा पर भारत का जोर
भारत ने पाकिस्तान से यह भी आग्रह किया है कि वह अपनी कस्टड़ी में बंद 35 भारतीय नागरिक कैदियों और मछुआरों को तुरंत कांसुलर एक्सेस प्रदान करे, जिन्हें अब तक यह सुविधा नहीं दी गई है। साथ ही, भारत ने यह भी कहा कि जब तक इन कैदियों और मछुआरों की रिहाई नहीं होती, पाकिस्तान को उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
क्या है द्विपक्षीय कांसुलर एक्सेस समझौते ?
द्विपक्षीय कांसुलर एक्सेस समझौता है, जिसमें दो देशों के बीच गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए नागरिकों की जानकारी एक-दूसरे देश के साथ साझा करना है। इससे कैदियों को कानूनी और मानवीय अधिकार मिलते हैं। साथ ही, कैदियों के रिहाई की प्रक्रिया में पारदर्शिता आती है।
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