अवैध खनन करना भविष्य की पीढ़ियों के लिए खतरा, अरावली मामले पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
अरावली मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि इससे पर्यावरण को बहुत नुकसान हो सकता है।
अरावली मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि इससे पर्यावरण को बहुत नुकसान हो सकता है। इसके अलावा अरावली क्षेत्र में खनन और उससे जुड़ी सभी पहलुओं की जांच करने के लिए एक समिति भी गठित करने का फैसला लिया है।
भविष्य की पीढ़ियों के लिए खतरा
अरावली मामले की सुनवाई करने के दौरान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि ऐसे संवेदनशील जगहों पर खनन करने से पर्यावरण के अलावा भविष्य की पीढ़ियों को भी गंभीर खतरा होगा।
विशेषज्ञ समिति गठन करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और एमिकस क्यूरी के. परमेश्वर को कहा कि अगले एक महीने के भीतर खनन से जुड़े मामलों में विशेषज्ञता करने वाले व्यक्तियों के नाम सुझाएं, ताकि इससे एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया जा सके।
अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा
इस मामले पर सुनवाई के दौरान कोर्ट को जानकारी दी गई कि अरावली क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों से अवैध खनन की घटना सामने आ रही है। इस विषय पर राजस्थान सरकार की ओर से पेश वकील सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कहा कि राज्य में किसी तरह के अवैध खनन को होने से रोका जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अरावली पहाड़ियों और उनकी श्रेणियों की एकरूप परिभाषा को लेकर 20 नवंबर को जारी आदेश पर फिलहाल रोक जारी रखने का फैसला किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित नई परिभाषा में कई गंभीर अस्पष्टताएं हैं, जिन्हें दूर किया जाना जरूरी है।
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