Haryana : एक सरपंच ऐसा भी…फर्जी मार्कशीट से लड़ा चुनाव, अब चढ़ा पुलिस के हत्थे
हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर पंचायत चुनाव लड़ने का मामला सामने आया है।
हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर पंचायत चुनाव लड़ने का मामला सामने आया है। शाहाबाद क्षेत्र के खरींडवा गांव के सरपंच पवन कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पवन पर आरोप है कि उसने 10वीं कक्षा की फर्जी मार्कशीट के सहारे वर्ष 2022 में सरपंच पद का चुनाव लड़ा था। आरोपी ने सेशन कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन हर स्तर पर उसकी अपील खारिज कर दी गई।
2022 में जीता था सरपंच का चुनाव
पवन कुमार ने साल 2022 में खरींडवा गांव से सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ा था। नामांकन के दौरान उसने CBSE की 10वीं कक्षा की मार्कशीट संलग्न की थी। चुनाव में पवन करीब 300 वोटों से जीत गया और उसे गांव का सरपंच नियुक्त कर दिया गया।
प्रतिद्वंदी ने लगाया फर्जीवाड़े का आरोप
चुनाव में हारने वाले उम्मीदवार संजीव कुमार ने नवंबर 2022 में उपायुक्त कुरुक्षेत्र को शिकायत दी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पवन कुमार ने फर्जी 10वीं की मार्कशीट तैयार करवाई, चुनाव में झूठा शपथपत्र दिया और अहम तथ्यों को छिपाया।
जांच में फर्जी निकली मार्कशीट
तत्कालीन उपायुक्त ने मामले की जांच करवाई, जिसमें पवन कुमार अपनी 10वीं की मार्कशीट को असली साबित नहीं कर सका। इसके बाद 27 दिसंबर 2024 को उपायुक्त ने आदेश जारी कर पवन कुमार को सरपंच पद से हटा दिया और तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
इसके बाद संजीव कुमार ने 30 दिसंबर 2024 को पुलिस में शिकायत दी। आरोप लगाया गया कि पवन कुमार ने बुरी नीयत से फर्जी दस्तावेज तैयार किए, सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाया और गलत तरीके से सरपंच पद हासिल किया। इस शिकायत पर थाना शाहाबाद में IPC की धाराओं 420, 120-बी, 463, 465, 466, 467 और 471 के तहत FIR दर्ज की गई।
काफी समय से था फरार
थाना शाहाबाद के SHO जगदीश टामक के अनुसार, आरोपी पवन कुमार लंबे समय से फरार चल रहा था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। रिमांड के दौरान फर्जी मार्कशीट तैयार करने और मामले में शामिल अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच की जाएगी।
CBSE सचिव की गवाही से खुला राज
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान CBSE के सचिव की गवाही हुई। सचिव ने स्पष्ट रूप से पवन कुमार की 10वीं की मार्कशीट को फर्जी बताया। इसके आधार पर हाईकोर्ट ने उसकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद पवन कुमार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन वहां से भी उसे कोई राहत नहीं मिली और उसकी अपील डिसमिस कर दी गई।
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