HomeBreaking News'देस पराया छोड़ के आ जा...' श्रीधर वेम्बू ने US में रह...

‘देस पराया छोड़ के आ जा…’ श्रीधर वेम्बू ने US में रह रहे भारतीयों से क्यों दोहराई वतन वापसी की हुंकार?

सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो (Zoho) के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने अमेरिका में कार्यरत भारतीय मूल के इंजीनियरों और उद्यमियों से भारत लौटने की अपनी अपील को एक बार फिर दोहराया है। हालांकि, इस बार उनकी यह अपील ऐसे दिन आई है जब उन्होंने जोहो में बढ़ते वित्तीय दबाव के कारण इस साल कर्मचारियों का परफॉर्मेंस अप्रेजल और सालाना वेतन वृद्धि न देने का ऐलान किया। वेम्बू का कहना है कि वे छंटनी जैसी स्थिति से बचने के लिए मार्केटिंग बजट और सैलरी हाइक जैसे खर्चों में कटौती कर रहे हैं। इस विरोधाभासी कदम के बाद टेक जगत में उनके रुख की आलोचना शुरू हो गई है और आलोचक पूछ रहे हैं कि जब भारतीय टेक उद्योग खुद चुनौतियों से जूझ रहा है, तब लौटने वाले पेशेवरों के लिए मौके कितने मजबूत हैं।

‘अमेरिका अब आपको नहीं चाहता’: वेम्बू का तीखा बयान

अप्रेजल न देने का ऐलान करने के कुछ ही घंटों बाद वेम्बू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि अमेरिका में अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे भारतीयों को वहां टिके रहने की कोशिश करने के बजाय स्वदेश लौट आना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब कोई दूसरा देश कहे कि घर जाओ, तो भीख मांगने या गैरकानूनी तरीके से रहने के बजाय सम्मान से घर लौट आना चाहिए। वेम्बू ने जोर देकर कहा कि भले ही सॉफ्टवेयर का क्षेत्र सीमित हो जाए, फिर भी भारत में करने के लिए लाखों काम हैं। उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी सरकार द्वारा माइक्रोसॉफ्ट, टाटा, विप्रो और इन्फोसिस जैसी 8 प्रमुख आईटी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन कार्यक्रम (ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का अहम चरण) से रोके जाने के बाद आई है।

आलोचकों के सवाल और जमीनी हकीकत

वेम्बू के इस बयान पर टेक कम्युनिटी और शिक्षाविदों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। एआई मेंटर संदीप मनुधाने ने टिप्पणी की कि अपनी कंपनी में वित्तीय दबाव और छंटनी के मुहाने पर खड़े होकर एनआरआई से लौटने का आग्रह करना विरोधाभासी है। वहीं, एक्स यूजर विनीत ने जोहो की सफलता का सम्मान करते हुए कहा कि केवल देशभक्ति से करियर नहीं चलता; पेशेवरों को सुरक्षित कारोबारी माहौल, सही पूंजी, ग्राहक और टिकाऊ रोजगार के मौकों की जरूरत होती है। उन्होंने दावा किया कि जोहो पिछले 18 महीनों से दबाव में है और वर्कफोर्स में बढ़ोतरी नहीं कर पा रहा है, ऐसे में वेतन वृद्धि रोकना लौटने वाले पेशेवरों के लिए सीमित अवसरों का संकेत देता है।

एआई की बढ़ती लागत और जोहो का वित्तीय दबाव

विदेशों में रह रहे भारतीयों से स्वदेश निर्माण की अपील करने वाले वेम्बू ने स्वीकार किया कि खुद जोहो भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी बढ़ती लागत और वित्तीय दबाव से जूझ रही है। कंपनी का प्राथमिकता खर्चों पर नियंत्रण रखना और कर्मचारियों को नौकरी से निकालने से बचाना है। वेम्बू ने एक्स पर पोस्ट कर माना कि इस फैसले से कर्मचारियों पर असर पड़ेगा और इसके लिए उन्होंने अपने कर्मचारियों से माफी भी मांगी है। एक तरफ अमेरिका में आव्रजन पाबंदियों और ग्रीन कार्ड पर अनिश्चितता से भारतीय आईटी पेशेवर परेशान हैं, तो दूसरी तरफ जोहो जैसे फैसले यह दर्शाते हैं कि भारतीय टेक कंपनियां भी वैश्विक मंदी और एआई क्रांति के वित्तीय दबावों से अछूती नहीं हैं।

 

READ MORE: राहुल गांधी की SIR याचिका में 14 गलतियां, भाजपा नेताओं ने कसा तंज

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular