पाकिस्तान से स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत संगठन ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ ने अपने ऐतिहासिक क्षेत्रों को फिर से बहाल करने और एक नए राष्ट्रीय नक्शे को अपनाने की घोषणा की है। संगठन का दावा है कि अतीत में अवैध और जबरन तरीके से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मिलाए गए बलोच बहुल क्षेत्रों को अब दोबारा बलूचिस्तान के मूल भूभाग में एकीकृत किया जाएगा। इस ऐतिहासिक फैसले के तहत पंजाब प्रांत के नियंत्रण वाले तौंसा शरीफ, डेरा गाजी खान और राजनपुर जैसे प्रमुख बलोच आबादी वाले जिलों को बलूचिस्तान के प्रत्यक्ष नियंत्रण में लाने का संकल्प लिया गया है।
BIG ANNOUNCEMENT 📻🎥🎙️📡
Republic of Balochistan’s Historic Announcement: The Launch of a Nationwide Campaign to Restore Baloch Areas Included in Punjab to The Map of Balochistan
14 September, 2026
The Republic of Balochistan announces the restoration of its historic… pic.twitter.com/FZnY1dodRF
— MIR YAR BALOCH (@miryar_baloch_) September 13, 2026
जातीय जनजातियों से एकजुटता और पहचान पत्र बदलने की अपील
रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने बलोच राष्ट्र को एकीकृत करने के उद्देश्य से एक व्यापक देशव्यापी अभियान शुरू किया है। इसके तहत पंजाब में सदियों से निवास कर रही लेघारी, खोसा, मजारी, द्रिशाक, कैसरानी, बुजदार, गोरचानी, सुखानी, खेतरान, रिंद, लशारी, होत, दश्ती, जमाली और जतोई जैसी प्रमुख जनजातियों और उप-जनजातियों से सांस्कृतिक और भाषाई संबंधों को मजबूत करने का आह्वान किया गया है। संगठन ने स्थानीय बलोच आबादी से अपने पहचान पत्र, पासपोर्ट, डोमिसाइल, स्कूल और जन्म प्रमाण पत्रों में ‘पंजाब’ के स्थान पर ‘बलूचिस्तान’ दर्ज कराने की अपील की है, ताकि उनकी ऐतिहासिक राष्ट्रीय पहचान सुरक्षित रह सके।
2024 के बलोच लॉन्ग मार्च का संदर्भ और जनसमर्थन का दावा
अपने आधिकारिक वक्तव्य में संगठन ने वर्ष 2024 के ‘बलोच लॉन्ग मार्च’ का विशेष उल्लेख किया। बयान के अनुसार, पंजाब के प्रशासनिक नियंत्रण में रह रहे लाखों बलोच नागरिकों ने लॉन्ग मार्च का जोरदार स्वागत किया था, जो बलूचिस्तान के साथ उनके पुनर्मिलन की दीर्घकालिक आकांक्षा को दर्शाता है। रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने इस कदम को दुनिया भर के 6 करोड़ बलोच नागरिकों के लिए गर्व और ऐतिहासिक एकता का प्रतीक बताया है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बलूचिस्तान का क्षेत्रफल 64 प्रतिशत दर्ज करने की मांग
भौगोलिक सीमाओं पर बड़ा दावा करते हुए संगठन ने कहा कि पाकिस्तानी कब्जे वाली ताकतों द्वारा बलूचिस्तान का क्षेत्रफल 44 प्रतिशत बताया जाता रहा है, जो कि भ्रामक है। संगठन के अनुसार, ऐतिहासिक और वास्तविक सीमाओं को शामिल करने के बाद बलूचिस्तान का कुल क्षेत्रफल 64 प्रतिशत बैठता है। रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने गूगल, अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों, भौगोलिक संगठनों और वैश्विक समुदाय से अपील की है कि वे अब से बलूचिस्तान के कुल भूभाग का उल्लेख 64 प्रतिशत के रूप में ही दर्ज और प्रदर्शित करें।
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