नेपाल में बुधवार को ग्लेशियर टूटने से आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद बिगड़े हालात के बीच भारतीय दूतावास लापता नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहा है। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने शुक्रवार को बताया कि दूतावास नेपाली सेना और विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर लापता पर्यटकों की तलाश कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीयों से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी नेपाली सेना के साथ साझा की जा रही है ताकि बचाव कार्य तेजी से पूरा किया जा सके।
84 भारतीयों को मिली नई जिंदगी
आपदा के बीच राहत की खबर यह है कि गुरुवार को तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित बचाकर काठमांडू पहुंचा दिया गया है। भारतीय राजदूत के अनुसार, प्राथमिकता इन तीर्थयात्रियों को पहले दिल्ली भेजने की है, जहां से वे अपने-अपने घर लौट सकेंगे। इसके अलावा त्रिशूली 1 पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे 63 भारतीय कर्मचारियों को भी सफलतापूर्वक बचा लिया गया है।
दोबारा बाढ़ का मंडराया खतरा
बचाव अभियानों के बीच नेपाल और चीन सीमा पर दोबारा बाढ़ का गंभीर संकट पैदा हो गया है। केरूंग (ग्याइरोंग) बॉर्डर पोर्ट के उपरी हिस्से में स्थित एक बैरियर झील के टूटने से नेपाल पुलिस ने रेड अलर्ट जारी किया है। तिब्बत की तरफ बनी इस झील का बांध टूटने के कारण राहत कर्मियों और स्थानीय लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं। मलबे के कारण बनी इस झील के खतरे को देखते हुए चीन ने भी तिब्बत में अपना रेस्क्यू ऑपरेशन फिलहाल रोक दिया है।
आपदा का खौफनाक आंकड़ा
बुधवार को हुए हिमस्खलन और ग्लेशियर टूटने की इस घटना ने भारी तबाही मचाई है। इस विनाशकारी आपदा में अब तक कम से कम 472 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों विदेशी पर्यटकों सहित लगभग 1,400 लोग अभी भी लापता हैं। भारतीय दूतावास स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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