Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधना भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन राखी बांधने के साथ तिलक, अक्षत और आरती की रस्म भी अहम मानी जाती है। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि पूजा की थाली सजाने के बाद सबसे पहले तिलक लगाया जाए या राखी बांधी जाए। धार्मिक परंपराओं के अनुसार आमतौर पर पहले भाई को तिलक लगाया जाता है और उसके बाद राखी बांधी जाती है।
तिलक के बाद लगाए जाते हैं अक्षत
रक्षाबंधन की रस्म शुरू करते समय बहन भाई को अपने सामने साफ आसन पर बैठाती है। इसके बाद उसके माथे पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाया जाता है। तिलक के ऊपर अक्षत यानी चावल लगाए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं में अक्षत को पूर्णता और मंगल का प्रतीक माना जाता है।
इसके बाद दाहिनी कलाई पर बांधें राखी
तिलक और अक्षत लगाने के बाद भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है। राखी बांधते समय बहन भाई के अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती है। इसके बाद भाई की आरती उतारने की परंपरा है।
आरती के बाद खिलाएं मिठाई
राखी बांधने के बाद बहन भाई की आरती करती है और फिर उसे मिठाई खिलाती है। इसके बदले भाई भी बहन को उपहार देकर उसके प्रति अपना स्नेह व्यक्त करता है। हालांकि अलग-अलग परिवारों में अपनी परंपराओं के अनुसार रस्मों के क्रम में थोड़ा बदलाव हो सकता है।
राखी की थाली में रखें ये सामान
रक्षाबंधन की पूजा थाली तैयार करने के लिए बहुत अधिक सामान की जरूरत नहीं होती। इसमें रोली या कुमकुम, अक्षत, राखी, दीपक, मिठाई और आरती की सामग्री रखी जा सकती है। थाली को फूलों और छोटी रंगोली से सजाकर इसे और आकर्षक बनाया जा सकता है।
घर की सजी थाली बनाती है त्योहार खास
आजकल बाजार में रक्षाबंधन की तैयार पूजा थालियां भी आसानी से मिल जाती हैं। हालांकि घर पर अपनी पसंद से सजाई गई थाली का अलग ही महत्व होता है। बहन इसमें भाई की पसंद के रंग या फूल शामिल कर सकती है, जिससे यह छोटी-सी तैयारी भी यादगार बन जाती है।
राखी बांधते समय इन बातों का रखें ध्यान
रक्षाबंधन की रस्म जल्दबाजी में करने के बजाय इसे शांत और सहज तरीके से पूरा करना बेहतर माना जाता है। राखी न तो बहुत ढीली होनी चाहिए और न ही इतनी कसकर बांधी जानी चाहिए कि भाई को परेशानी हो। पूजा की थाली में रखी सभी सामग्री साफ होनी चाहिए। वहीं, दीपक जलाते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए।
परिवार की परंपरा का भी रखें सम्मान
रक्षाबंधन की मुख्य परंपरा में तिलक, अक्षत, राखी, आरती और मिठाई का विशेष स्थान माना जाता है। सामान्य तौर पर तिलक और अक्षत के बाद राखी, फिर आरती होती है और मिठाई खिलाई जाती है। फिर भी परिवारों में चली आ रही परंपरा के अनुसार कुछ रस्मों का क्रम अलग हो सकता है, जिसे सम्मान के साथ निभाया जा सकता है।
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