Delhi Government on Pollution: दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक रहेगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने दिल्लीवासियों से प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले निर्माण स्थलों की जानकारी सरकार तक पहुंचाने की अपील भी की है।
500 वर्ग मीटर से बड़े स्थलों पर नजर
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले निर्माण स्थलों की निगरानी दिल्ली सरकार के ‘डस्ट पोर्टल’ और एआई से लैस कैमरों के जरिए की जाएगी। नियमों का उल्लंघन सामने आने पर सरकार के नियंत्रण और कमान केंद्र को रियल टाइम अलर्ट मिलेगा।
‘एक्स’ पर CM ने की अपील
रेखा गुप्ता ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “अगर आपको इसका कोई उल्लंघन दिखे तो एमसीडी, अपने विधायक या सीधे मुझे सूचित करें।” उन्होंने लोगों से सोशल मीडिया के जरिए उन्हें टैग करने और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ शिकायत करने की भी अपील की। शिकायत मिलने के बाद संबंधित स्थलों को नोटिस और चेतावनी दी जाएगी, साथ ही जरूरत पड़ने पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
पिछले साल नियमों के बावजूद जारी रहा निर्माण
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पिछली सर्दियों में चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (ग्रैप) लागू होने के बावजूद कुछ जगहों पर निर्माण गतिविधियां चलती रही थीं। इस बार सरकार ऐसे मामलों की रियल टाइम निगरानी के जरिए पहचान करने और तुरंत कार्रवाई करने की तैयारी में है।
जुलाई में लॉन्च हुआ था डस्ट पोर्टल 2.0
दिल्ली सरकार ने निर्माण और ध्वस्तीकरण स्थलों की निगरानी मजबूत करने और धूल प्रदूषण नियंत्रण उपायों के बेहतर काम के लिए जुलाई में एआई-संचालित डस्ट पोर्टल 2.0 शुरू किया था। इसका उद्देश्य निर्माण स्थलों पर प्रदूषण से जुड़े नियमों के पालन की निगरानी को ज्यादा प्रभावी बनाना है।
GIS मैपिंग और 360 डिग्री कैमरों से निगरानी
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा विकसित डस्ट पोर्टल 2.0 में 500 वर्ग गज या उससे बड़े निर्माण स्थलों की निगरानी के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित मैपिंग की सुविधा है। इसमें लाइव 360-डिग्री पैन-टिल्ट-ज़ूम कैमरे, पीएम 10 और पीएम 2.5 मापने वाले सेंसर और एआई आधारित विश्लेषण प्रणाली को एक साथ जोड़ा गया है।
प्रदूषण रोकने के लिए सख्त निगरानी
नई व्यवस्था के तहत निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन सुनिश्चित करने के साथ धूल प्रदूषण पर भी नजर रखी जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि सर्दियों में निर्माण गतिविधियों से होने वाले अतिरिक्त प्रदूषण को रोका जाए और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ समय पर कार्रवाई की जा सके।
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