डाबर इंडिया को अपने कई फूड प्रोडक्ट्स को लेकर बड़ी राहत मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट ने बीते शुक्रवार को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें डाबर को ‘100% शुद्ध’, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावे करने वाले कुछ उत्पादों की बिक्री रोकने को कहा गया था। जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि डाबर इन उत्पादों को कई वर्षों से बेच रही है। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना बिक्री रोकने का आदेश कैसे जारी किया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
बिना सुनवाई के आदेश पर कोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान डाबर की ओर से दलील दी गई कि FSSAI ने बिक्री पर रोक लगाने से पहले कंपनी को न तो कारण बताओ नोटिस दिया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। कंपनी ने इसे न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से FSSAI के आदेश का बचाव किया गया। सरकार के वकील ने कहा कि डाबर को इससे पहले भी इंप्रूवमेंट नोटिस और एडवाइजरी दी जा चुकी हैं। सरकार का तर्क था कि खाद्य उत्पादों पर ‘100 प्रतिशत’ जैसे दावे उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं। अदालत ने अंतरिम राहत का विरोध किए जाने पर कहा कि कंपनी इन उत्पादों को लंबे समय से बेच रही है। ऐसे में अचानक बिक्री रोकने का आदेश सही प्रक्रिया के बिना नहीं दिया जाना चाहिए।
क्या था FSSAI का आदेश?
FSSAI ने 3 अगस्त को डाबर के कई उत्पादों की बिक्री रोकने का निर्देश दिया था। इनमें ऐसे उत्पाद शामिल थे, जिनकी पैकेजिंग या प्रचार में ‘100% शुद्ध’, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावे किए गए थे। FSSAI के आदेश में डाबर हनी, डाबर हनी स्क्वीजी, डाबर सुंदरबन हनी, डाबर ऑर्गेनिक हनी, डाबर हिमालयन एप्पल साइडर विनेगर, डाबर गाय का घी, रियल एक्टिव 100% टेंडर कोकोनट वॉटर और डाबर होममेड कोकोनट मिल्क समेत कई उत्पाद शामिल थे।
डाबर ने हाईकोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाया?
डाबर ने FSSAI के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि कार्रवाई से पहले कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए था। कंपनी ने खाद्य सुरक्षा और मानक विनियम, 2018 का हवाला देते हुए कहा कि नियामक को पहले कंपनी से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए था और उसके जवाब पर विचार करना चाहिए था। डाबर ने यह भी दावा किया कि FSSAI के आदेश से उसके बाजार में मौजूद उत्पादों को वापस लेने या उनकी पैकेजिंग बदलने की स्थिति पैदा हो सकती थी। कंपनी के अनुसार, आदेश को सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद कुछ डिस्ट्रीब्यूटर्स और ऑनलाइन विक्रेताओं ने भी इन उत्पादों की बिक्री से दूरी बनानी शुरू कर दी थी।
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