दक्षिण अमेरिका के दो प्रमुख पड़ोसी देश ब्राजील और अर्जेंटीना के बीच राजनीतिक तनाव लगातार गहराता जा रहा है। फुटबॉल से लेकर क्षेत्रीय राजनीति तक दोनों देशों के संबंध अब कूटनीतिक स्तर पर भी प्रभावित होने लगे हैं। ब्राजील ने अर्जेंटीना में अपने कूटनीतिक स्टाफ की संख्या कम करने का फैसला किया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब ब्राजील का आरोप है कि अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली ने सार्वजनिक मंचों से ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा और देश की न्यायपालिका के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं।
माइली के बयानों पर ब्राजील की नाराजगी
ब्राजील के विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति माइली ने हाल के दिनों में राष्ट्रपति लूला को कई बार “चोर” और मुख्य न्यायधीश को कचरा कहा है। इसके अलावा उन्होंने एक राजनीतिक सम्मेलन के दौरान ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अलेक्जेंडर डी मोरेस के लिए भी अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। डी मोरेस ने माइली के उस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था, जिसमें उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो से मुलाकात की अनुमति मांगी थी। बोल्सोनारो तख्तापलट की कोशिश से जुड़े मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद सजा काट रहे हैं। ब्राजील ने इससे पहले जुलाई में ब्यूनस आयर्स से अपने राजदूत जूलियो बिटेली को वापस बुला लिया था। फिलहाल अर्जेंटीना में ब्राजील का प्रतिनिधित्व एक चार्ज डी अफेयर्स (कार्यवाहक राजदूत) कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि जब तक माइली की ओर से इस तरह की टिप्पणियां जारी रहेंगी, तब तक राजदूत की वापसी नहीं होगी।
क्षेत्रीय राजनीति बने तनाव की वजह
राष्ट्रपति लूला ने अब तक माइली के बयानों पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन दिसंबर 2023 में माइली के सत्ता संभालने के बाद से दोनों देशों के संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तनाव के पीछे वैचारिक मतभेद भी एक बड़ी वजह हैं। राष्ट्रपति माइली को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का करीबी सहयोगी माना जाता है, जबकि ट्रंप प्रशासन और लूला सरकार के संबंध भी सहज नहीं रहे हैं। इसी बीच अमेरिका और ब्राजील के बीच भी हाल में वीजा विवाद सामने आया है।
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