Iran US Conflict: ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइल और ड्रोन से बड़ा हमला किया है, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि करते हुए बताया कि एक सैनिक अभी भी लापता है। बयान के मुताबिक, यह घटना उस समय हुई जब अमेरिकी सैनिक ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले का जवाब दे रहे थे। इसके साथ ही इस जंग में अब तक मारे गए अमेरिकी सैनिकों की कुल संख्या 16 हो गई है।
घायलों को अस्पताल से मिली छुट्टी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, हमले में घायल हुए चार अमेरिकी सैनिकों को इलाज के लिए जॉर्डन के अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद सभी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। हालांकि, मारे गए और घायल सैनिकों की पहचान या दूसरी प्राइवेट जानकारी फिलहाल पब्लिक नहीं की गई है।
अमेरिका ने किया जवाबी हमला
सैनिकों की मौत के बाद अमेरिका ने रविवार सुबह ईरान के खिलाफ जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि ये हमले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर किए गए। अमेरिकी सेना के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करना था, जिसके जरिए वह होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
IRGC के ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिकी सेना ने अपने बयान में कहा कि कार्रवाई का एक उद्देश्य IRGC को जवाब देना भी था, जिस पर जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमले का आरोप है। ईरानी समाचार एजेंसी मेहर के मुताबिक, अमेरिकी हमले दक्षिणी बंदरगाह शहर सिरिक के आसपास के इलाकों में किए गए। इसके अलावा हजियाबाद के पास भी कई ठिकानों को निशाना बनाया गया।
मोजतबा खामेनेई की चेतावनी
इस बीच ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका ने ईरान पर हमले जारी रखे तो उसे ऐसा जवाब मिलेगा जिसे वह कभी नहीं भूल पाएगा। उन्होंने अमेरिका पर समझौतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ट्रंप के हस्ताक्षरों की कोई कीमत नहीं है। अपने बयान में उन्होंने अमेरिका को धोखेबाज और दुष्ट बताया जिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।
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