Uttarakhand Monsoon: उत्तराखंड में मॉनसून के बीच संभावित आपदाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पर सभी जिलों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में भारी बारिश, चार धाम यात्रा, डेंगू की रोकथाम और पूरे प्रदेश में आपदा प्रबंधन की तैयारियों का जायजा लिया गया। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि ”लोगों की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही, ढिलाई या सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
24×7 अलर्ट रहने और फील्ड में उतरने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से केवल समीक्षा बैठकों तक सीमित न रहने और जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने को कहा। उन्होंने सभी विभागों और जिला प्रशासन को मॉनसून के दौरान 24×7 अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए। धामी ने कहा कि किसी भी आपदा या इमरजेंसी की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों में देरी नहीं होनी चाहिए। साथ ही जिलाधिकारियों को हर बड़ी घटना की सूचना मुख्यमंत्री कार्यालय और राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र को देने और समय पर राहत देने के निर्देश दिए।
चार धाम यात्रा की व्यवस्थाओं पर फोकस
बैठक में चार धाम यात्रा की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने जिलेवार सड़कों की स्थिति, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, तीर्थयात्रियों की आवाजाही और चारों धामों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि चार धाम यात्रा करोड़ों लोगों की आस्था के साथ-साथ उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था से भी जुड़ी है। इसलिए यात्रियों की सुरक्षा, सुचारू यातायात, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए।
44.65 लाख से अधिक श्रद्धालु कर चुके हैं यात्रा
अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि इस वर्ष अब तक 44.65 लाख से अधिक श्रद्धालु चार धाम यात्रा कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का पहुंचना उत्तराखंड के प्रति लोगों के विश्वास को दर्शाता है और हर यात्री सुरक्षित तथा संतोषजनक अनुभव के साथ अपने घर लौटे, यह देखना सरकार की जिम्मेदारी है।
भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में पहले से होगी तैयारी
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों में JCB, पोकलैंड मशीनें, तकनीकी टीमें और अन्य जरूरी उपकरण पहले से तैनात किए जाएं, ताकि सड़कें बंद होने की स्थिति में उन्हें तुरंत खोला जा सके। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में GPS और आधुनिक संचार प्रणालियों के प्रभावी उपयोग पर भी जोर दिया।
सभी विभाग मिलकर करेंगे काम
CM धामी ने NDRF, SDRF, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, बिजली, पेयजल और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भारी बारिश या भूस्खलन से बाधित बिजली, पानी और संचार सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर बहाल किया जाए। साथ ही दूर-दराज और संवेदनशील क्षेत्रों में अनाज, दवाइयां, ईंधन और दूसरी जरुरी चीजों उपलब्ध कराईं जाएं।
कमजोर वर्गों की सुरक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री ने गर्भवती महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर संवेदनशील क्षेत्रों से गर्भवती महिलाओं को पहले ही सुरक्षित स्थानों या चिकित्सा केंद्रों में पहुंचाया जाए। इसके अलावा आपातकालीन राहत और बचाव कार्यों के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं को भी स्टैंडबाय पर रखने के निर्देश दिए गए।
डेंगू और आपदा प्रबंधन को लेकर भी सख्ती
डेंगू की रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री ने शहरी निकायों और ग्राम पंचायतों को नियमित फॉगिंग, लार्वा-रोधी स्प्रे, सफाई अभियान और जलभराव खत्म करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग को सभी अस्पतालों में टेस्टिंग किट, दवाइयां, रक्त, अस्पताल के बिस्तर और पर्याप्त मेडिकल स्टाफ उपलब्ध रखने को कहा गया। इसके साथ ही मॉनसून के दौरान पुलों का सुरक्षा ऑडिट, नालों की गहन सफाई, दूरस्थ क्षेत्रों में वैकल्पिक संचार व्यवस्था विकसित करने, “गोल्डन आवर” सिद्धांत का पालन करने और जनप्रतिनिधियों, गैर सरकारी संगठनों व स्थानीय संस्थाओं के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के भी निर्देश दिए गए।
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