US Missiles Strike Chabahar Port: ईरान- अमेरिका जंग की आग अब भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। बुधवार को अमेरिकी मिसाइलों ने ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद अहम चाबहार पोर्ट को निशाना बनाया। हमले में पोर्ट के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल पर कई मिसाइलें गिरीं, जिससे टर्मिनल को भारी नुकसान पहुंचा। यह घटना भारत के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि इसी शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के विकास में भारत ने करोड़ों डॉलर का निवेश किया हुआ है।
भारत के लिए क्यों अहम है चाबहार पोर्ट?
चाबहार पोर्ट का शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल भारत के लिए सिर्फ एक बंदरगाह नहीं, बल्कि मध्य एशिया तक पहुंच का अहम प्रवेश द्वार है। इसके जरिए भारत ने पाकिस्तान को बायपास करने वाला ऑप्शनल व्यापारिक मार्ग तैयार किया है। पहले भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक सामान भेजने के लिए पाकिस्तान के रास्ते पर निर्भर रहना पड़ता था, जहां अक्सर बाधाएं आती थीं। चाबहार पोर्ट ने भारत को इस निर्भरता से काफी हद तक राहत दिलाई।
‘INSTC’ के लिए भी अहम कड़ी
यह टर्मिनल INSTC का एक बेहद अहम हिस्सा है। इस कॉरिडोर के जरिए भारत का माल ईरान पहुंचने के बाद रूस और फिर यूरोप तक कम समय और कम लागत में पहुंच सकता है। वहीं, पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट पर चीन की मजबूत मौजूदगी को देखते हुए चाबहार में भारत की भागीदारी को रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम माना जाता है। ग्वादर पोर्ट चाबहार से महज 170 किलोमीटर दूर है।
भारत के निवेश को भी लगा झटका
हाल ही में भारत और ईरान के बीच चाबहार पोर्ट के संचालन को लेकर 10 साल का दीर्घकालिक समझौता हुआ था। इसके तहत भारत ने पोर्ट के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया था और क्रेन समेत भारी मशीनरी भी लगाई थी। अमेरिकी हमले में क्रेन, गोदाम और रेल लिंक को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। ऐसे में भारत के निवेश और संसाधनों को भी बड़ा झटका लगने की आशंका जताई जा रही है।
मध्य एशिया के व्यापार पर असर
हमले के बाद चाबहार पोर्ट का संचालन अनिश्चित काल के लिए प्रभावित हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो भारत से अफगानिस्तान और मध्य एशिया जाने वाले माल की आवाजाही पर असर पड़ेगा। इससे उन व्यापारिक मार्गों को भी झटका लगेगा, जिन्हें विकसित करने में भारत ने सालों तक कूटनीतिक प्रयास किए हैं।
‘INSTC’ परियोजना की रफ्तार पड़ सकती है धीमी
चाबहार पोर्ट पर हुए हमले का असर भारत की INSTC परियोजना पर भी पड़ सकता है। रूस और यूरोप तक तेज और कम लागत वाले व्यापारिक मार्ग का जो लक्ष्य इस परियोजना के जरिए तय किया गया था, वह फिलहाल प्रभावित होता दिखाई दे रहा है। जब तक शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल पूरी तरह दोबारा संचालन के लिए तैयार नहीं हो जाता, तब तक इस पूरे कॉरिडोर की रफ्तार धीमी रहने की आशंका बनी रहेगी।
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