90 के दशक में अनुराधा पौडवाल(Anuradha Paudwal) हिंदी फिल्म संगीत की प्रमुख आवाजों में शामिल थीं। उनकी सुरीली आवाज ने कई फिल्मों के गानों को यादगार बना दिया। हालांकि, उनके करियर में एक ऐसा मोड़ आया जब उन्होंने फिल्मी गीतों से दूरी बनाकर भक्ति संगीत की ओर अपना रुख किया। इसके बाद उन्होंने देवी-देवताओं पर आधारित अनेक भजन गाए जो आज भी श्रद्धालुओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
अनुराधा पौडवाल ने केवल हिंदू धार्मिक गीतों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने विभिन्न धर्मों से जुड़े आध्यात्मिक गीत भी गाए। उनकी आवाज में रिकॉर्ड किए गए भजन और अमृतवाणियां आज मंदिरों, धार्मिक आयोजनों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लगातार सुनी जाती हैं। भक्ति संगीत में उनके योगदान के कारण उन्हें अक्सर ‘भजन क्वीन’ के नाम से भी जाना जाता है।
अपने भजनों को सुनकर क्यों भर आती हैं आंखें?
एक हालिया बातचीत में अनुराधा पौडवाल ने बताया कि भक्ति संगीत उनके लिए केवल गायन नहीं बल्कि आध्यात्मिक अनुभव है। उन्होंने कहा कि जब वह गंगा आरती या बड़े मंदिरों में अपने गाए हुए भजन सुनती हैं तो भावनाओं को रोक पाना मुश्किल हो जाता है। उनके अनुसार, यह अनुभव शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है।
उन्होंने बताया कि बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे पवित्र स्थलों पर सुबह की आरती के समय उनके भजन बजना उनके लिए बेहद भावुक कर देने वाला क्षण होता है। उन्होंने इसे भगवान का आशीर्वाद बताया।
हजारों भक्ति गीतों से बनाई खास पहचान
अनुराधा पौडवाल ने हिंदी, मराठी, गुजराती और संस्कृत समेत कई भाषाओं में बड़ी संख्या में भक्ति गीत रिकॉर्ड किए हैं। उनके द्वारा गाई गई शिव अमृतवाणी और अन्य आध्यात्मिक रचनाओं को श्रोताओं का विशेष प्रेम मिला है। उनका मानना है कि जीवन के अनुभवों और कठिन दौर ने उन्हें आध्यात्मिकता के और करीब पहुंचाया जिसके बाद भक्ति संगीत उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गया।