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कंज्यूमर कोर्ट ने मारुति सुज़ुकी को 2024 में बेची गई नॉन-E20-कम्प्लायंट ग्रैंड विटारा को बदलने का दिया आदेश

छत्तीसगढ़ की एक कंज्यूमर कोर्ट ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर, नेक्सा मैग्नाटो को निर्देश दिया है कि वे ‘ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड’ को एक नए E20-कम्पैटिबल मॉडल से बदलें। कोर्ट ने यह पाया कि खरीदार को यह नहीं बताया गया था कि गाड़ी E20 पेट्रोल पर नहीं चल सकती।

रायपुर के ज़िला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 14 जुलाई को यह आदेश पारित किया। आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत डॉ. प्रेमराज देवता की शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। ‘लाइव लॉ’ की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने माना कि जून 2024 में बिना यह बताए कि गाड़ी E20-कम्पैटिबल नहीं है, उसे बेचना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना जाएगा।

जानकारी देने का सवाल

यह आदेश ऐसे समय में आया है जब कई वाहन मालिकों ने E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है। आयोग का फ़ैसला इस बात पर ज़ोर देता है कि निर्माताओं और डीलरों की यह ज़िम्मेदारी है कि वे खरीदारों को गाड़ी की फ़्यूल कम्पैटिबिलिटी (ईंधन अनुकूलता) के बारे में स्पष्ट रूप से बताएं, खासकर तब जब ज़्यादा इथेनॉल-मिश्रित ईंधन पेश किया जा रहा हो।

शिकायत के अनुसार, डॉ. देवता ने 3 जून, 2024 को मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड डेल्टा प्लस 1.5 खरीदी थी। हालांकि गाड़ी 2024 में बेची गई थी, लेकिन इसे जनवरी 2023 में बनाया गया था। खरीदने के पांच महीने के भीतर ही, पेट्रोल में खराबी (कंटैमिनेशन) का पता चलने के बाद गाड़ी खराब हो गई। अधिकृत सर्विस सेंटर ने फ़्यूल टैंक की सफ़ाई की और गाड़ी वापस कर दी।

मरम्मत के बावजूद समस्या बनी रही

हालांकि, वही समस्या फिर से सामने आई, जिसके कारण फ़्यूल टैंक को दूसरी बार साफ़ करना पड़ा। सर्विस सेंटर ने बताया कि हो सकता है कि पिछली बार सफ़ाई ठीक से न हुई हो। डॉ. देवता ने पेट्रोल का एक सैंपल सरकारी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में भी टेस्ट करवाया, जहाँ उसमें इथेनॉल पाया गया और उसकी बनावट दही जैसी थी।

बार-बार मरम्मत, ईंधन बदलने और पेट्रोल टैंक की सफ़ाई के बावजूद, गाड़ी बार-बार बंद होती रही। डॉ. देवता ने आयोग को बताया कि बार-बार होने वाली समस्याओं के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी हुई, जिसके बाद उन्होंने राहत पाने के लिए उपभोक्ता फोरम का दरवाज़ा खटखटाया।

 

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