फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूक्रेन की सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। पेरिस में आयोजित ‘कोएलिशन ऑफ द विलिंग’ शिखर सम्मेलन के दौरान उन्होंने घोषणा की कि यूक्रेन को अपनी ही जमीन पर मिसाइल और बम बनाने का लाइसेंस दिया जाएगा। इसका लक्ष्य यूक्रेन के रक्षा उत्पादन को मजबूत करना और हथियारों के निर्माण की रफ्तार बढ़ाना है।
क्रूज मिसाइल का होगा स्थानीय निर्माण
नए लाइसेंसिंग समझौतों के तहत यूक्रेन स्थानीय स्तर पर एस्टर-30 एयर डिफेंस इंटरसेप्टर, एएएसएम ग्लाइड बम और स्कैल्प-ईजी क्रूज मिसाइल का निर्माण कर सकेगा। मैक्रों ने यह भी कहा कि आने वाले हफ्तों में फ्रांस और इटली मिलकर यूक्रेन को अतिरिक्त एयर डिफेंस बैटरियां और इंटरसेप्टर उपलब्ध कराएंगे। इसके अलावा 16 राफेल लड़ाकू विमान भी वर्ष 2028-29 तक यूक्रेन को मिलने की उम्मीद है।
रूस ने नाटो पर लगाए आरोप
फ्रांस और ब्रिटेन की अगुआई में बना ‘कोएलिशन ऑफ द विलिंग’ यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी तैयार करने पर काम कर रहा है। हालांकि, रूस ने इस पहल का कड़ा विरोध किया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इसे “युद्ध को आगे बढ़ाने वाले देशों का गठबंधन” बताया। वहीं, रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने आरोप लगाया कि नाटो सदस्य देश यूक्रेन को पश्चिमी सैन्य तकनीकों के परीक्षण केंद्र में बदल रहे हैं।
बुल्गारिया ने सैन्य सहायता बढ़ाने से किया इनकार
बुल्गारिया के प्रधानमंत्री रुमेन रादेव ने कहा कि उनका देश यूक्रेन को लगातार सैन्य सहायता देने वाले पश्चिमी देशों के गठबंधन का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन संकट का समाधान हथियारों की आपूर्ति बढ़ाने से नहीं, बल्कि प्रभावी कूटनीतिक प्रयासों से निकलेगा।
प्रधानमंत्री रुमेन रादेव ने कहा कि बुल्गारिया अतिरिक्त सैन्य सहायता देने के पक्ष में नहीं है, क्योंकि इससे संघर्ष और लंबा खिंच सकता है। उन्होंने बताया कि उनका देश अब तक यूक्रेन को 13 सैन्य सहायता पैकेज दे चुका है और आगे भेजने के लिए अतिरिक्त सैन्य सामग्री उपलब्ध नहीं है।
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