Iran-US Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच हुआ सीजफायर समझौता पूरी तरह टूटने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के सभी प्रमुख बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह अमेरिका की बात नहीं मानता, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
अरब सागर में अमेरिकी सैन्य ताकत की तैनाती
उत्तरी अरब सागर में नाकेबंदी लागू करने के लिए अमेरिका ने कम से कम 19 युद्धपोत तैनात किए हैं। इनमें दो एयरक्राफ्ट कैरियर और एक एम्फीबियस असॉल्ट शिप शामिल है, जिस पर 1,000 से अधिक मरीन तैनात हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने मंगलवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “पूरे मिडिल ईस्ट में सैकड़ों मिलिट्री एयरक्राफ्ट काम कर रहे हैं।”
ईरान पर जहाजों पर हमले का आरोप
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने नाकेबंदी की वजह बताते हुए आरोप लगाया कि पिछले 7 दिनों में ईरान ने जानबूझकर सात कमर्शियल जहाजों पर हमला किया। इन घटनाओं में लगभग एक दर्जन क्रू मेंबर्स मारे गए, लापता हुए या घायल हुए हैं। सेंटकॉम का यह भी दावा है कि ईरान ने पड़ोसी खाड़ी देशों पर दर्जनों मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और नागरिकों की जान खतरे में पड़ी है।
होर्मुज टोल योजना बदली
ट्रंप ने पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर 20% टोल लगाने की घोषणा की थी। हालांकि, नाकेबंदी शुरू होने से कुछ घंटे पहले उन्होंने यह प्रस्ताव वापस ले लिया। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि खाड़ी देशों के नेताओं के सुझाव पर अब टोल की जगह अमेरिका में अरबों डॉलर के निवेश की योजना पर विचार किया जाएगा।
‘पावर प्लांट, पुल… सब तबाह’
फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, ‘अगले हफ्ते पावर प्लांट्स और पुलों की बारी आएगी, जब तक कि वो बातचीत की मेज पर नहीं आते। हम उनके सभी पावर प्लांट्स और पुलों को तब तक तबाह करेंगे, जब तक वो बातचीत के लिए तैयार नहीं होते।’ ट्रंप के इस बयान ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।
ईरान का पलटवार और जवाब
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने ट्रंप की धमकियों का जवाब देते हुए कहा कि ईरान अपने देश के एक-एक इंच क्षेत्र की रक्षा करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ‘ट्रंप का कठोरपन खुद अमेरिकी जनता के ही काबिल है।’ वहीं, अमेरिकी नाकेबंदी से पहले अमेरिकी सेना ने ईरान के तटीय रक्षा तंत्र, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों पर हवाई हमले किए। केशम द्वीप, अहवाज और बंदर अब्बास में तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन को निशाना बनाकर हमले किए।
टैंकरों पर हमला
ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले UAE के दो टैंकरों- ‘मोम्बासा’ और ‘अल बहिया’ पर भी हमला किया। इस घटना में दो नाविकों की मौत हो गई, जबकि 14 अन्य घायल हुए। ईरानी सेना का दावा है कि इन जहाजों ने उसकी बार-बार दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया था। वहीं, CENTCOM के अनुसार, 14 जुलाई की रात अमेरिका ने सात घंटे तक चले हवाई अभियान में होर्मुज और ईरानी तटीय क्षेत्रों के पास दर्जनों सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इस दौरान मिसाइल और ड्रोन ठिकानों, नौसैनिक क्षमताओं और तटीय रक्षा प्रणालियों को खत्म करने का दावा किया गया।
बोतलबंद पानी की फैक्ट्री भी बनी निशाना
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना के अनुसार, पश्चिमी ईलाम प्रांत के मुसियन जिले में एक गांव के पास मौजूद एक बोतलबंद पानी की फैक्ट्री पर तीन प्रोजेक्टाइल्स गिरे। देहलोरन के गवर्नर मुराद येगानेह ने बताया कि हमले में फैक्ट्री के उपकरणों को नुकसान पहुंचा, हालांकि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
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