EPFO Salary Limit: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने की अपनी योजना फिलहाल टाल दी है। यह फैसला कंपनियों पर ज्यादा वित्तीय बोझ न पड़े इसी वजह से लिया गया है। हालांकि, सरकार ने संकेत दिए हैं कि आगे चलकर इस प्रस्ताव पर सभी संबंधित पक्षों से बातचीत के बाद फैसला लिया जाएगा।
बढ़ोतरी से क्यों बढ़ता कंपनियों का खर्च?
यदि वेतन सीमा 25,000 रुपये प्रति माह कर दी जाती, तो जरुरी EPF योगदान बढ़कर 3,000 रुपये प्रति माह हो जाता। मौजूदा नियमों के तहत कर्मचारी और कंपनी, दोनों कर्मचारी के बेसिक वेतन का 12-12% EPFO में जमा करते हैं। ऐसे में सैलरी लिमिट बढ़ने पर दोनों साइड का मंथली कंट्रीब्यूशन भी बढ़ जाता, जिससे कंपनियों पर ज्यादा बोझ पड़ता।
नई लेबर कोड भी बनी बड़ी वजह
सरकारी सूत्रों के अनुसार, नई लेबर कोड (Labour Codes) लागू होने के बाद कंपनियों की वैधानिक देनदारियों (Statutory Liabilities) में 15 से 20% तक की वृद्धि हुई है। बताया गया है कि अकेले आईटी सेक्टर ने नए श्रम कानूनों का पालन करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त खर्च किया है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, सरकार फिलहाल उद्योगों पर और वित्तीय दबाव नहीं डालना चाहती। इसलिए वेतन सीमा बढ़ाने से पहले सभी स्टेकहोल्डर्स से व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा।
अभी 15,000 रुपये ही है वेतन सीमा
वर्तमान में EPFO के तहत 15,000 रुपये प्रति माह की वेतन सीमा लागू है। इस सीमा में आखिरी बार वर्ष 2014 में संशोधन किया गया था। इसी आधार पर कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जरुरी कंट्रीब्यूशन तय होता है। यदि किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन 15,000 रुपये प्रति माह से अधिक है, तो उसके पास EPF और EPS में शामिल न होने (Opt-out) का ऑप्शन होता है।
जानिए अभी कितना जमा होता है PF?
मौजूदा व्यवस्था के अनुसार कर्मचारी और कंपनी, दोनों कर्मचारी के बेसिक वेतन का 12-12% हर महीने EPFO में जमा करते हैं। कर्मचारी का पूरा 12% योगदान EPF खाते में जमा होता है, जबकि कंपनी के 12% योगदान में से 8.33% कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और 3.67% EPF खाते में जमा किया जाता है। वर्तमान 15,000 रुपये की वेतन सीमा के अनुसार इस कैटेगरी के कर्मचारियों के लिए अधिकतम 1,800 रुपये प्रति माह कर्मचारी और 1,800 रुपये प्रति माह कंपनी की ओर से जमा किए जाते हैं।
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