राम मंदिर दान चोरी मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों ने पुलिस कस्टडी के दौरान जांचकर्ताओं को बताया कि उन्होंने चोरी के पैसे को अपने बैंक खातों में वापस लाने से पहले, उसके सोर्स को छिपाने के लिए रिश्तेदारों और करीबी साथियों के ज़रिए घुमाया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि बैंक ट्रांज़ैक्शन रिकॉर्ड से इस तरह के ट्रांज़ैक्शन पैटर्न की पुष्टि हुई है।
पूछताछ के दौरान, मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा ने कथित तौर पर बताया कि उसने और सह-आरोपी अविनाश शुक्ला ने चोरी के पैसे का कुछ हिस्सा शेयर बाज़ार में लगाया और लोगों को ब्याज पर पैसे भी दिए। जांचकर्ताओं ने कहा कि आरोपियों ने कैश के सोर्स को छिपाने के लिए पैसे को अपने खातों में वापस लाने से पहले रिश्तेदारों और परिचितों को फंड ट्रांसफर किया।
जांचकर्ताओं को ऐसे ट्रांज़ैक्शन मिले जो आरोपियों के रिश्तेदारों की ज्ञात आय के सोर्स की तुलना में बहुत ज़्यादा थे, जिसके बाद पुलिस ने उनके 30 बैंक खाते फ्रीज़ कर दिए हैं। अब मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे का पता लगाने और सभी लाभार्थियों की पहचान करने के लिए फाइनेंशियल ट्रेल की जांच की जा रही है।
आरोपियों से मिली जानकारी
तीनों आरोपी अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे अभी पुलिस रिमांड पर हैं। उन्हें बुधवार सुबह कोर्ट की मंज़ूरी के बाद ज़िला जेल से कस्टडी में लिया गया था। पूछताछ के दौरान, उन्होंने कथित तौर पर चोरी की बात कबूल की और इस काम से जुड़ी कई जानकारियां दीं। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर गुरुवार को और कैश और गहने बरामद किए जा सकेंगे।
जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों ने दावा किया कि उन्हें दान का पैसा निकालने में कोई खास मुश्किल नहीं हुई क्योंकि इसमें टिन्नू और गिनती के इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव की कथित मिलीभगत थी। उन्होंने पुलिस को यह भी बताया कि चोरी किए गए कैश और गहनों का कुछ हिस्सा अलग-अलग जगहों पर छिपाया गया था।
जांच के हिस्से के तौर पर, पुलिस तीनों आरोपियों को 14 कोसी परिक्रमा रूट पर एक बाग में ले गई, जहां जांचकर्ताओं के अनुसार, चोरी का पैसा कथित तौर पर इसमें शामिल लोगों के बीच बांटा गया था। इस जगह की पहचान पहले सह-आरोपी अविनाश शुक्ला ने कस्टडी में पूछताछ के दौरान की थी। पुलिस ने कहा कि उन्होंने मौके पर तीनों आरोपियों के बयानों की पुष्टि की और पहले किए गए खुलासों से उनका मिलान किया।
नकली दान रसीद भी बरामद
जांचकर्ताओं ने पूछताछ के दौरान एक नकली दान रसीद भी बरामद की। आरोपियों ने कथित तौर पर माना कि उन्होंने नकली दान रसीदें छपवाई थीं और उनका इस्तेमाल करके भक्तों से पैसे इकट्ठा किए थे। दान जमा करने के बजाय, उन्होंने कथित तौर पर नकली रसीदें दे दीं और कैश अपनी जेब में रख लिया।
जांच का दायरा अब उस कार तक भी बढ़ गया है जिसे आरोपी अनुकल्प मिश्रा ने पिछले साल खरीदा था। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि गाड़ी खरीदने के लिए इस्तेमाल किए गए पैसे का स्रोत क्या था, पेमेंट कैसे किया गया, बैंक ट्रांज़ैक्शन और मालिकाना हक के दस्तावेज़ क्या हैं। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि क्या यह गाड़ी मंदिर के दान से कथित तौर पर हेराफेरी किए गए पैसे से खरीदी गई थी। दान के पैसे के कथित दुरुपयोग की बड़ी जांच के तहत इस वित्तीय लेन-देन की भी बारीकी से जांच की जा रही है।
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