अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि और चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। यह निर्णय उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भेजी गई SIT की रिपोर्ट के बाद लिया गया, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था और दान प्रबंधन में गंभीर खामियों की ओर संकेत किया गया है। जबकि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
SIT रिपोर्ट में क्या सामने आया?
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि के अनुसार, SIT की रिपोर्ट न्यासियों के सामने पढ़ी गई, लेकिन उस पर विस्तृत चर्चा नहीं की गई। रिपोर्ट में दान की निगरानी, सुरक्षा प्रणाली और प्रबंधन प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता बताई गई है। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि जांच जारी है और अंतिम फैसला आने के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
इस्तीफे के बावजूद VHP में रहेंगे चंपत राय
विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने साफ किया है कि चंपत राय ने केवल राम मंदिर ट्रस्ट के पद से इस्तीफा दिया है। संगठन में उनकी जिम्मेदारियों को लेकर फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। VHP का कहना है कि जब तक पुलिस और SIT की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनके खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। चंपत राय ने भी कहा है कि उनके पास लगाए गए आरोपों का जवाब मौजूद है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने दावा किया कि उन्होंने SIT को कई दस्तावेज सौंपे हैं और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त दस्तावेज भी उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने राम मंदिर के प्रबंधन को धार्मिक संतों और परंपरागत धर्माचार्यों के हाथों में सौंपने की मांग भी दोहराई। दूसरी ओर, ट्रस्ट ने कहा है कि जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
राम मंदिर दान प्रबंधन से जुड़े इस मामले ने देशभर का ध्यान आकर्षित किया है। ट्रस्ट ने प्रशासनिक सुधारों की दिशा में कदम उठाते हुए नए सीईओ की नियुक्ति करने का भी फैसला किया है। अब सभी की नजर SIT की अंतिम रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

