सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे मेटा को तलब करें। यह कदम इंस्टाग्राम पर उन विज्ञापनों को लेकर उठाया गया है, जिनमें कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) को बढ़ावा दिया जा रहा था।
उम्मीद है कि मंत्रालय इस सोशल मीडिया कंपनी से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगेगा और यह बताने को कहेगा कि प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन (सामग्री की निगरानी) के सिस्टम होने के बावजूद इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापन कैसे दिखाई दिए।
IT Minister directs MeitY officials to summon Meta on the matter of Instagram ads promoting child sexual abuse material in India. MeitY to seek explanation from Meta on the issue: sources
— Vasudha Venugopal (@Vasudha156) July 3, 2026
इस हफ़्ते मेटा के खिलाफ केंद्र सरकार की यह दूसरी कार्रवाई है। इससे पहले बुधवार को सरकार ने व्हाट्सएप के प्रस्तावित यूज़रनेम फ़ीचर को लेकर कंपनी को नोटिस जारी किया था। सरकार ने चिंता जताई थी कि इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, फ़िशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और पहचान की चोरी (इम्पर्सोनेशन) जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।
केंद्र ने व्हाट्सएप को निर्देश दिया था कि जब तक सरकार के साथ बातचीत पूरी नहीं हो जाती और उसकी चिंताओं का संतोषजनक समाधान नहीं हो जाता, तब तक इस फ़ीचर को रोल आउट न किया जाए।
नोटिस में मेटा से यह भी पूछा गया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत कंपनी के खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए, क्योंकि प्रस्तावित फ़ीचर से साइबर सुरक्षा जोखिम बढ़ सकते हैं।
इसके अलावा, सरकार ने मेटा को याद दिलाया कि व्हाट्सएप को एक ‘महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थ’ (significant social media intermediary) के तौर पर वर्गीकृत किया गया है, इसलिए वह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और उससे जुड़े नियमों के तहत निर्धारित ‘ड्यू डिलिजेंस’ (उचित सावधानी) की ज़रूरतों का पालन करने के लिए बाध्य है।

