तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक ‘स्पेशल लीव पिटिशन’ दायर की है। यह याचिका मद्रास हाई कोर्ट के 27 मई के उस आदेश के खिलाफ है जिसमें अगस्त 1976 के सरकारी आदेश को लागू करके पूरे राज्य में गो-हत्या पर रोक लगाने को कहा गया था।
यह याचिका राज्य सरकार के सचिव ने दायर की है। इसमें ‘हिंदू मक्कल काची’ की युवा शाखा के सचिव के. सूर्या (उर्फ के. सूर्या प्रशांत) को प्रतिवादी बनाया गया है, जिन्होंने हाई कोर्ट में मूल रिट याचिका दायर की थी। साथ ही, पुलिस महानिदेशक (DGP) समेत अन्य अधिकारियों को भी प्रतिवादी बनाया गया है। के. सूर्या की ओर से पेश वकील पी.वी. योगेश्वरन ने सुप्रीम कोर्ट में एक ‘कैविएट’ दायर की है।
आदेश 1976 के आदेश पर आधारित
27 मई का आदेश जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की खंडपीठ ने दिया था। इसमें मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक/पुलिस बल के प्रमुख (DGP/HoPF) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था कि तमिलनाडु में बकरीद की पूर्व संध्या या किसी अन्य दिन किसी भी गाय या बछड़े की हत्या न हो। यह आदेश 1976 के उस आदेश पर आधारित था जिसमें दूध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार के हित में गो-हत्या पर रोक लगाई गई थी।
फैसला लिखने वाले जस्टिस स्वामीनाथन ने इस बात पर जोर दिया था कि संविधान का अनुच्छेद 48 राज्य से यह अपेक्षा करता है कि वह गायों, बछड़ों और अन्य दुधारू व बोझा ढोने वाले मवेशियों की हत्या पर रोक लगाने के लिए कदम उठाए। संविधान सभा में हुई बहस के दौरान भी इस बात को रेखांकित किया गया था कि गाय एक पूजनीय पशु है और भगवान कृष्ण के समय से ही हमारी सभ्यता से जुड़ी रही है।
READ MORE: राबड़ी देवी ने खाली किया 10 सर्कुलर रोड का बंगला, लालू परिवार का 20 साल पुराना सियासी ठिकाना खत्म!

