HDFC Chairman Rajiv Kumar: देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC बैंक में सोमवार को बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। बैंक ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त और पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को नया पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया गया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब इसी साल मार्च में पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने नैतिक चिंताओं का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
बोर्ड ने चार साल के कार्यकाल को दी मंजूरी
बैंक के बोर्ड ने राजीव कुमार को 30 जून 2026 से अगले चार सालों के लिए एडिशनल इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त करने की भी मंजूरी दी है। बैंक ने अपनी रेगुलेटरी फाइलिंग में साफ किया है कि सेबी या किसी दूसरी वैधानिक संस्था की ओर से राजीव कुमार के निदेशक पद संभालने पर कोई कानूनी रोक नहीं है। हालांकि, उनकी नियुक्ति के प्रभावी होने के लिए अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की अंतिम मंजूरी का इंतजार है।
कठिन दौर में संभाली थी बैंकिंग व्यवस्था की जिम्मेदारी
राजीव कुमार का प्रशासनिक और वित्तीय क्षेत्र में लंबा अनुभव रहा है। बतौर मुख्य चुनाव आयुक्त उन्होंने दुनिया का सबसे बड़ा आम चुनाव सफलतापूर्वक पूरा कराया। इससे पहले साल 2017 से 2020 के बीच केंद्रीय वित्तीय सेवा विभाग के सचिव के रूप में उन्होंने उस दौर में जिम्मेदारी संभाली, जब सरकारी बैंक बढ़ते एनपीए, पूंजी की कमी और नोटबंदी के बाद बने वित्तीय दबाव से जूझ रहे थे।
शेल कंपनियों पर बड़ी कार्रवाई से मिली पहचान
वित्तीय सेवा विभाग का कार्यभार संभालने के महज 15 दिनों के भीतर राजीव कुमार ने करीब तीन लाख 38 हजार फर्जी यानी शेल कंपनियों के बैंक खाते फ्रीज कराने की बड़ी कार्रवाई कराई थी। इस कदम को काले धन के नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई माना गया था और बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम पहल के रूप में देखा गया।
फोर-आर रणनीति से बैंकिंग सेक्टर को मिली मजबूती
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बैंकिंग प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए फोर-आर यानी रिकग्निशन, रेजोल्यूशन, रीकैपिटलाइजेशन और रिफॉर्म्स की रणनीति लागू की। इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्ट्सी कोड के प्रभावी इस्तेमाल के जरिए बड़े कर्जदारों की जवाबदेही तय की गई। इसके साथ ही बैंकों में तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी डाली गई, जिससे उनकी ऋण देने की क्षमता मजबूत हुई। इसी अवधि में 27 सरकारी बैंकों का विलय कर उन्हें 12 बड़े और प्रतिस्पर्धी बैंकों में बदला गया।
लोन धोखाधड़ी रोकने के लिए किए अहम सुधार
राजीव कुमार के कार्यकाल में बैंकिंग धोखाधड़ी रोकने के लिए कई नीतिगत बदलाव किए गए। 50 करोड़ रुपये या उससे अधिक के सभी कर्जों के लिए पासपोर्ट विवरण देना जरुरी किया गया, ताकि डिफॉल्टर कार्रवाई से पहले देश न छोड़ सकें। वहीं 250 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े ऋणों के लिए आईटी आधारित रिस्क स्कोरिंग सिस्टम लागू किया गया। इसके अलावा आम जमाकर्ताओं को राहत देते हुए बैंक जमा पर मिलने वाले इंश्योरेंस कवर को एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया गया।
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