पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार आज विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक पेश करने जा रही है। इसे राज्य सरकार के प्रमुख चुनावी वादों में से एक माना जा रहा है। यदि यह विधेयक सदन में पेश होता है, तो उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद पश्चिम बंगाल भी UCC लागू करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाने वाला राज्य बन जाएगा।
सरकार का कहना है कि UCC का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में सभी समुदायों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। वहीं, विपक्ष इस प्रस्ताव को राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मुद्दा बता रहा है।
इस बार विधानसभा की कार्यवाही इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी गुटबाजी भी खुलकर सामने आ सकती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, टीएमसी का बागी गुट भी UCC का विरोध करेगा, लेकिन वह सदन में अपनी अलग राजनीतिक पहचान और प्रभाव दिखाने की कोशिश करेगा। इससे विपक्ष के भीतर भी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।
जबकि, UCC पर होने वाली बहस केवल कानूनी पहलुओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह राज्य की राजनीति और आगामी राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है। विधानसभा में इस विधेयक पर होने वाली चर्चा और मतदान पर सभी दलों की नजर रहेगी। अब देखना होगा कि सरकार इस विधेयक को किस तरह आगे बढ़ाती है और विपक्ष, विशेषकर टीएमसी के दोनों गुट, सदन के भीतर किस रणनीति के साथ सरकार का सामना करते हैं।

