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‘परसों हो या कुछ दिन बाद… चेकिंग तो होगी’, 10 परमाणु बम का मसाला छुपाए बैठा है ईरान? न्यूक्लियर साइट्स पर IAEA की दो टूक

Iran Nuclear Program Rafael Grossi:अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने साफ किया है कि ईरान के परमाणु स्थलों का निरीक्षण IAEA की टीम करके रहेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के तहत परमाणु सामग्री और परमाणु सुविधाओं की निगरानी एजेंसी की जिम्मेदारी है। ऐसे में निरीक्षण होना तय है, चाहे इसमें कुछ दिन का समय ही क्यों न लगे।

युद्ध के बाद से नहीं मिली निरीक्षण की अनुमति

इजरायल ने 2025 में ईरान के साथ 12 दिनों तक चले युद्ध के दौरान उसके कई परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके बाद अमेरिका ने भी B-2 बमवर्षक विमानों से फोर्दो, नतांज और इस्फहान स्थित परमाणु सुविधाओं पर हमले किए थे। इन हमलों के बाद से ईरान ने IAEA को इन जगहों तक पहुंचने की अनुमति नहीं दी है। माना जाता है कि इन ठिकानों पर मौजूद उच्च स्तर के शुद्ध यूरेनियम से ईरान चाहे तो लगभग 10 परमाणु बम बना सकता है। हालांकि, तेहरान लगातार अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह शांतिपूर्ण बताता रहा है।

निरीक्षण को लेकर दोनों देशों के अलग-अलग दावे

23 जून को अमेरिका और ईरान ने परमाणु स्थलों के निरीक्षण को लेकर अलग-अलग दावे किए थे। अमेरिका ने कहा था कि ईरान निरीक्षण की अनुमति देने पर सहमत हो गया है, जबकि ईरान ने इस दावे को खारिज कर दिया था। इसके बाद IAEA प्रमुख के बयान ने संकेत दिया है कि समझौते के तहत निरीक्षण को आगे बढ़ाया जाएगा।

‘मैं राजनीतिक बयानों को समझ सकता हूं’

जापान के फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राफेल मारियानो ग्रॉसी ने कहा, ‘मैं राजनीतिक बयानों को समझ सकता हूं, वे वास्तविकता का हिस्सा हैं। लेकिन मैं आपको यह याद दिलाना चाहता हूं कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उस समझौते में साफ लिखा है कि परमाणु सामग्री और परमाणु सुविधाओं से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी IAEA द्वारा की जाएगी। जाहिर है, ऐसा करने के लिए हमें निरीक्षण करना होगा। यह निरीक्षण परसों हो, एक हफ्ते बाद हो या 10 दिन बाद, यह अहम जरूर है, लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि यह होगा।’

यूरेनियम भंडार पर रहेगी खास नजर

यह निरीक्षण इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि समझौते के तहत ईरान के उच्च स्तर पर शुद्ध यूरेनियम को कम शुद्ध स्तर तक लाने यानी ‘डाउनब्लेंड’ करने की बात कही गई है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी के लिए यह तय करना जरूरी होगा कि ईरान के परमाणु भंडार और उससे जुड़ी गतिविधियों की वास्तविक स्थिति क्या है।

क्या बोला ईरान ?

ग्रॉसी के बयान पर ईरान की ओर से फिलहाल कोई रिएक्शन नहीं आया है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने मंगलवार को तेहरान में कहा था कि पिछले साल अमेरिका की बमबारी का निशाना बने परमाणु स्थलों पर संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को भेजने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। उन्होंने यह बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयान को खारिज करते हुए दिया था।

कुछ स्थलों तक पहुंच

12 दिन के युद्ध के बाद IAEA को बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र जैसे कुछ दूसरे परमाणु स्थलों का दौरा करने की अनुमति मिली है। हालांकि, एजेंसी अब भी यूरेनियम स्थलों तक नहीं पहुंच पा रही है। इसी वजह से वह यह पता नहीं लगा पा रही कि ईरान के यूरेनियम भंडार की स्थिति क्या है और इसे शुद्ध बनाने में इस्तेमाल होने वाली सेंट्रीफ्यूज मशीनों की मौजूदा स्थिति कैसी है।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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