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80 मिनट बातचीत के बाद वॉकआउट! स्विट्जरलैंड में लेबनान संकट पर भिड़े अमेरिका-ईरान, पहले दौर की वार्ता में क्या हुआ हासिल?

Iran-US Switzerland Meeting: मिडिल ईस्ट में कई महीनों से जारी तनाव के बीच स्विट्जरलैंड में रविवार को अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच पहले दौर की अहम बैठक हुई है। करीब 80 मिनट तक चली इस मीटिंग में दोनों देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, प्रतिबंधों में राहत और अन्य अहम मुद्दों पर बातचीत की, लेकिन बैठक के दौरान कई बड़े मतभेद भी खुलकर सामने आए। लेबनान में जारी हालात को लेकर दोनों देशों के बयानों में साफ अंतर दिखाई दिया, जिससे बातचीत के बीच माहौल तनावपूर्ण हो गया।

संघर्ष खत्म करने की दिशा में हुई पहल

हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद आयोजित इस बैठक का उद्देश्य चार महीने से जारी युद्ध को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ना था। अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस बातचीत में शामिल हुए, जबकि ईरान का प्रतिनिधित्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने किया।

मध्यस्थ देशों से भी हुई अलग-अलग बातचीत

बैठक शुरू होने से पहले ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इसके बाद ईरान ने साफ किया कि अमेरिका के साथ बातचीत कितनी बढ़ेगी ये इस बात पर निर्भर करेगा कि वह समझौते की शर्तों को जमीन पर किस हद तक लागू करता है और लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए क्या फैसले लेता है।

सीजफायर लागू न होने का लगाया आरोप

ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह अब तक समझौते की पहली और सबसे अहम शर्त, यानी सभी मोर्चों पर सीजफायर लागू कराने में सफल नहीं हुआ है। ईरान का कहना है कि लेबनान में जारी इजरायली सैन्य कार्रवाई इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि समझौते के कई फैसलों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

ट्रंप के बयान से बढ़ा बातचीत का तनाव

बातचीत के दौरान तनाव तब और बढ़ गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ईरान को चेतावनी दी कि वह लेबनान में अपने सहयोगी समूहों को नियंत्रित करे। इस बयान पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने नाराजगी जताई और कुछ समय के लिए बैठक छोड़ दी। हालांकि बाद में बातचीत दोबारा शुरू हुई।

ईरान ने US को दी सावधानी बरतने की सलाह

बैठक के बाद मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा कि अमेरिका को अपने बयानों में सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान की सेना किसी भी परिस्थिति का जवाब देने के लिए तैयार है। वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पूरे घटनाक्रम को कूटनीतिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा बताते हुए कहा कि कठिन बातचीत में ऐसे उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और वार्ता आगे बढ़ती रहती है।

रिश्ते सुधारने पर दिया गया जोर

जेडी वेंस ने यह भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को ईरान के साथ संबंधों को बेहतर बनाने के लिए नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद बैठक में मौजूद तनाव साफ दिखाई दिया।

हैंडशेक और तस्वीर लेने से भी साफ इनकार

वार्ता के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने प्रस्तावित प्रतीकात्मक हैंडशेक और साथ में तस्वीर लेने से भी इनकार कर दिया। इससे दोनों देशों के बीच जारी अविश्वास और मतभेद साफ दिखाई दिया।

अपनी बात पर अड़ा इजरायल

दूसरी ओर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया कि दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैन्य मौजूदगी फिलहाल जारी रहेगी। नेतन्याहू का कहना है कि ‘इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए जो क्षेत्र बनाया है उसे जरूरत पड़ने तक बनाए रखेगा।’ उन्होंने यह भी कहा, ‘इजरायल एक खुद्दार देश है। हर बात पर सहमति होना जरूरी नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप हर कुछ नहीं करते, जो हम चाहते हैं और न ही मैं हर कुछ करता हूं जो वो चाहते हैं।’

कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा असर

ईरान-अमेरिका मीटिंग में बने तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दिया। मतभेद बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 81 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। बाजार में एक डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता भी बढ़ गई है।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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