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पाताल में छिपा था मां पार्वती का खोया कर्णफूल… लौटाने से शेषनाग का इंनकार, महादेव ने दिखाया रौद्र रूप फिर… क्यों आज भी खौलता है यहां का पानी?

Mata Parvati Manikaran Temple: भारत में बहुत से ऐसे मंदिर और जगहें हैं जहां के रहस्य सुनकर व्यक्ति मंत्रमुग्ध हो जाता है। हिन्दू धर्म शास्त्रों में ऐसा माना जाता है कि, माता सती के अंग जिस-जिस स्थान पर ग‍िरे उसी स्थान पर शक्तिपीठ बन गया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि, हिमाचल की वादियों में एक ऐसा मंदिर भी छुपा है जिसकी कहानी सुनकर आपको यकीन करना मुश्किल हो जायेगा। भगवान शिव ने माता पार्वती की एक कान की बाली खोजने के लिए प्रलय की स्थिति उत्पन्न कर दी थी।

हिमाचल की खूबसूरत वादियों में बसा है मणिकर्ण

हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत पार्वती घाटी में मौजूद मणिकर्ण केवल अपनी सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी पौराणिक मान्यताओं के कारण भी बेहद प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इसी स्थान पर माता पार्वती का कर्णफूल यानी कान की बाली गिर गई थी। जिसके बाद ही इस जगह का नाम मणिकर्ण पड़ा था। यह स्थल हिंदू और सिख दोनों समुदायों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मणिकर्ण हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में भुंतर से उत्तर-पश्चिम दिशा में पार्वती घाटी में स्थित है। यह स्थान व्यास और पार्वती नदियों के मध्य बसा हुआ है। समुद्र तल से लगभग 1760 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह धार्मिक स्थल हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।

कैसे खो गया था माता पार्वती का कर्णफूल?

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार एक बार भगवान शिव और माता पार्वती विहार के लिए इस क्षेत्र में आए थे। इसी दौरान माता पार्वती का कर्णफूल कहीं खो गया। माता की पसंदीदा वस्तु खो जाने पर भगवान शिव खुद ही उसकी खोज में जुट गए थे। ऐसा कहा जाता है कि वह कर्णफूल पाताल लोक पहुंच गया और शेषनाग के पास चला गया।

शेषनाग पर क्यों क्रोधित हुए थे महादेव?

कथा के अनुसार जब भगवान शिव को पता चला कि कर्णफूल शेषनाग के पास है तो उन्होंने उसे वापस लाने का प्रयास किया। एक मान्यता के अनुसार शेषनाग ने बाद में कर्णफूल लौटा दिया। वहीं दूसरी मान्यता कहती है कि जब शेषनाग कर्णफूल देने में विलंब कर रहे थे, तब भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो गए। इसी दौरान शेषनाग ने जोरदार फुंकार भरी, जिससे मणिकर्ण क्षेत्र में गर्म पानी के प्राकृतिक स्रोत उत्पन्न हुए। आज भी यहां के गर्म जलकुंड श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

मणिकर्ण को लेकर एक अन्य धार्मिक मान्यता

मणिकर्ण को लेकर एक अन्य धार्मिक मान्यता यह भी प्रचलित है। कहा जाता है कि महाप्रलय के विनाश के बाद महाराज मनु ने इसी स्थान पर मानव सृष्टि का पुनर्निर्माण किया था। यही कारण है कि इस क्षेत्र का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

रघुनाथ मंदिर और शिव मंदिर की विशेष मान्यता

मणिकर्ण में स्थित रघुनाथ मंदिर भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि कुल्लू के राजा ने अयोध्या से भगवान राम की प्रतिमा लाकर यहां स्थापित की थी। इसके अलावा यहां स्थित भगवान शिव के मंदिर में कुल्लू घाटी के अनेक देवता समय-समय पर अपनी सवारी के साथ दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जिससे यह स्थान धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना रहता है।

सिख धर्म में भी है विशेष महत्व

मणिकर्ण केवल हिंदुओं के लिए ही नहीं, बल्कि सिख समुदाय के लिए भी अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है। यहां स्थित गुरुद्वारा श्री मणिकर्ण साहिब, सिखों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि श्री गुरु नानक देव जी ने भाई मरदाना जी और पंच प्यारों के साथ इस स्थान की यात्रा की थी। इस यात्रा की स्मृति में गुरुद्वारे का निर्माण कराया गया। पंजाब सहित देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। गुरुद्वारा परिसर में पूरे वर्ष दोनों समय लंगर की सेवा निरंतर चलती रहती है, जिसमें सभी धर्मों के लोग शामिल होते हैं।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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