NEET Exam को लेकर देशभर में एक बार फिर लाखों छात्रों की मेहनत की परीक्षा हो रही है। पेपर लीक विवाद के बाद 21 जून को आयोजित दोबारा परीक्षा में 22 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए। इसी बीच पश्चिम बंगाल की एक छात्रा सृष्टि दुबे की कहानी सामने आई जिसने गंभीर हादसे के बावजूद अपने सपने को अधूरा नहीं छोड़ा।
कोलकाता के ढाकुरिया स्थित बिनोदिनी गर्ल्स हाई स्कूल परीक्षा केंद्र पर सृष्टि ने मेडिकल सहायता के बीच NEET परीक्षा दी। कुछ दिन पहले हुए एक भयानक सड़क हादसे में उसकी 9 पसलियां टूट गई थीं और फेफड़ों में भी गंभीर चोटें आई थीं। दुर्घटना के बाद उसकी बड़ी सर्जरी हुई और उसे कई दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया। स्वास्थ्य में थोड़ा सुधार आने के बाद भी सृष्टि ने परीक्षा में शामिल होने की इच्छा जताई।
पिता ने शिक्षा मंत्री से की अपील
सृष्टि के पिता शीशराम दुबे ने बताया कि बेटी डॉक्टर बनने के अपने लक्ष्य को लेकर पूरी तरह दृढ़ थी। उन्होंने शिक्षा मंत्री से अपील करते हुए परीक्षा में बैठने की अनुमति मांगी थी। अपनी याचिका में उन्होंने अनुरोध किया था कि छात्रा को मेडिकल सपोर्ट के साथ परीक्षा देने की सुविधा दी जाए और उसके लिए ग्राउंड फ्लोर पर विशेष व्यवस्था की जाए।
केंद्र के बाहर मौजूद रही मेडिकल टीम
छात्रा की स्थिति को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय की ओर से मामले पर ध्यान दिया गया। इसके बाद परीक्षा केंद्र पर सृष्टि के लिए अलग कमरे की व्यवस्था की गई। साथ ही, किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए केंद्र के बाहर एंबुलेंस और मेडिकल टीम भी मौजूद रही।
सृष्टि ने अस्पताल से जुड़े जरूरी इंतजामों और चिकित्सकीय निगरानी के बीच परीक्षा पूरी करने का प्रयास किया। उसके माता-पिता ने इस सहयोग के लिए प्रशासन और शिक्षा मंत्री का आभार जताया। सृष्टि की कहानी उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किल परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य को पाने का हौसला बनाए रखते हैं।