दिल्ली पुलिस ने एक संगठित साइबर अपराध गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह साइबर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए निकालने और उसे आगे पहुंचाने का काम करता था। आरोपी इस काम के बदले कमीशन लेते थे।
पुलिस ने अपनी अहम कार्रवाई करते हुए करीब 9 लाख रुपये की संदिग्ध साइबर ठगी की रकम को बैंकों में ट्रांस्फर होने से समय रहते रोक लिया। जांच आगे बढ़ने पर इस मामले के तार एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़ते दिखाई दिए हैं।
बैंक अधिकारी की सूचना से शुरू हुई जांच
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब जसोला स्थित एक बैंक शाखा के अधिकारियों को कुछ संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिली। बैंक प्रबंधन ने बिना देरी किए इसकी सूचना पुलिस को दी।
सूचना मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआती जांच में पुलिस को कई ऐसे बैंक खाते मिले जिनमें संदिग्ध लेनदेन हुए थे। इसके बाद तकनीकी निगरानी और वित्तीय जांच के माध्यम से पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया गया।
ठगी की रकम को खातों से निकालते थे आरोपी
पुलिस जांच में पता चला कि गिरफ्तार आरोपी सीधे तौर पर साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम देने के बजाय ठगी से प्राप्त रकम को बैंक खातों से निकालने और उसे आगे ट्रांसफर करने का काम करते थे। इसके बदले उन्हें तय कमीशन दिया जाता था। पुलिस ने वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास (22), वंश (21), अमित (28), बलवीर कुमार (23) और फैयाज आलम (22) के रूप में हुई है। सभी आरोपी दिल्ली के निवासी बताए जा रहे हैं।
मुंबई के करोड़ों रुपये के फ्रॉड से जुड़े तार
पुलिस जांच के दौरान इस मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार आरोपियों का संबंध मुंबई में दर्ज एक बड़े साइबर धोखाधड़ी(Mumbai Cyber Fraud) मामले से हो सकता है।
पुलिस के मुताबिक, मुंबई में एक निजी कंपनी को निशाना बनाकर 3 जून से 15 जून 2026 के बीच कई डिजिटल ट्रांजैक्शन के जरिए करीब 10.40 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई थी। इस मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच के दक्षिण साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज केस के तहत की जा रही है।
वित्तीय लेनदेन की जांच जारी
दिल्ली पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों की गहराई से जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ठगी की रकम किन बैंक खातों में पहुंची, किन लोगों तक ट्रांसफर हुई और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब तक सामने आए तथ्यों के आधार पर करोड़ों रुपये के वित्तीय ट्रेल की जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी इस साइबर अपराध सिंडिकेट का केवल एक हिस्सा हैं। गिरोह के कई अन्य सदस्य अभी भी फरार हैं जिनकी तलाश के लिए अलग-अलग टीमों को लगाया गया है।