उत्तराखंड(Uttarakhand) के रुद्रप्रयाग जिले में एक महिलाओं द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) ने स्थानीय स्तर पर एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। यह समूह न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में काम कर रहा है बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से भी जुड़कर एक नई पहचान बना रहा है। लगभग 50 से अधिक महिलाओं का यह समूह पवित्र केदारनाथ धाम में चढ़ाए जाने वाले महाप्रसाद के रूप में तैयार होने वाले लड्डुओं के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
इस समूह द्वारा बनाए जा रहे लड्डू मुख्य रूप से पारंपरिक मोटे अनाज जैसे अमरंथ (राजगीरा) से तैयार किए जाते हैं। यह अनाज न केवल पौष्टिक होता है बल्कि उत्तराखंड की पारंपरिक कृषि विरासत का भी हिस्सा है। राज्य सरकार के बाजरा मिशन के तहत इन मोटे अनाजों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे किसानों और ग्रामीण समुदायों दोनों को लाभ मिल रहा है। इसी पहल के अंतर्गत इन महिलाओं को कच्चा माल उपलब्ध कराया जाता है जिससे वे प्रसाद निर्माण का कार्य कर सकें।
बाजरा मिशन कृषि नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा
राज्य सरकार द्वारा शुरू किया गया बाजरा मिशन उत्तराखंड की कृषि नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इस मिशन का उद्देश्य कम पानी में उगने वाली पारंपरिक फसलों जैसे बाजरा, मंडुआ और अमरंथ को पुनर्जीवित करना है। साथ ही किसानों की आय बढ़ाने और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है।
मुख्य कृषि अधिकारी लोकेंद्र बिष्ट ने बताया कि यह मिशन किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। उनके मुताबिक, पारंपरिक फसलों की खेती को बढ़ावा देकर न केवल उत्पादन बढ़ाया जा रहा है बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित किए जा रहे हैं।
ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण
इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण है। पहले सीमित घरेलू जिम्मेदारियों तक सिमटी रहने वाली महिलाएं अब उत्पादन और आय सृजन की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। समूह की सदस्य सोबती देवी ने बताया कि इस काम ने उनके जीवन में आर्थिक स्थिरता लाई है और अब उन्हें नियमित आय का स्रोत मिल रहा है।
उनका कहना है कि इस पहल से कई महिलाओं को घर के पास ही रोजगार मिल गया है जिससे उन्हें बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती और वे अपने परिवार की देखभाल के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी योगदान दे पा रही हैं।
स्थानीय संस्कृति और आजीविका का संगम
केदारनाथ धाम के लिए प्रसाद निर्माण का यह कार्य केवल एक आर्थिक गतिविधि नहीं है बल्कि यह स्थानीय संस्कृति, आस्था और आजीविका का सुंदर संगम भी है। एक ओर यह परंपरागत धार्मिक व्यवस्था को मजबूत करता है वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर देता है।
इस तरह रुद्रप्रयाग की यह पहल यह दर्शाती है कि यदि सरकारी योजनाओं को स्थानीय भागीदारी के साथ जोड़ा जाए तो वे न केवल आर्थिक विकास को गति दे सकती हैं बल्कि सामाजिक बदलाव का माध्यम भी बन सकती हैं।