अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच किसी भी संभावित नए समझौते को लेकर अपनी बेबाक राय रखी है। ओबामा का स्पष्ट तौर पर मानना है कि मौजूदा अमेरिकी प्रशासन अगर तेहरान के साथ कोई नई डील करता भी है, तो उसका साल 2015 में किए गए उनके ऐतिहासिक परमाणु समझौते पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि ट्रंप की ओर से किसी भी ऐसी डील की उम्मीद करना पूरी तरह से अवास्तविक है जो ग्यारह साल पहले हुए पुराने समझौते की तुलना में बहुत अधिक बेहतर या अलग हो।
सीधे युद्ध और टकराव से बचने की दी सलाह
रविवार को एबीसी न्यूज़ के लोकप्रिय टॉक शो “दिस वीक” में ओबामा के एक ताज़ा साक्षात्कार के कुछ अंश प्रसारित किए गए। इस इंटरव्यू के दौरान पूर्व राष्ट्रपति ने बातचीत और कूटनीति के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीधे सैन्य टकराव या लड़ाई में उलझने से कहीं अधिक बेहतर यह है कि ऐसी डील पर सहमति बनाई जाए। ओबामा के अनुसार, भले ही वह नई डील वॉशिंगटन की हर एक शर्त या ज़रूरत को पूरी तरह से संतुष्ट न करती हो, फिर भी युद्ध की स्थिति से बचने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।
पुरानी डील की सफलता की याद दिलाई
अपने कार्यकाल के दौरान साल 2015 में हुए परमाणु समझौते का बचाव करते हुए ओबामा ने उसकी सफलताओं को भी मजबूती से सामने रखा। उन्होंने याद दिलाया कि वह शुरुआती समझौता काफी लंबे समय तक बहुत प्रभावी ढंग से अपना काम कर रहा था। इस दौरान उन्होंने मौजूदा प्रशासन के फैसले पर निशाना साधते हुए कहा कि वह ऐतिहासिक डील तब तक बिल्कुल सही ढंग से चली, जब तक कि खुद अमेरिका ने इससे अपने कदम पीछे नहीं खींच लिए। ट्रंप द्वारा उस अहम समझौते से अमेरिका को बाहर करने के संदर्भ में ओबामा का यह बयान विश्व राजनीति में काफी अहम माना जा रहा है।
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