Ram Mandir Offering Scam: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में लोगों ने जो राशि दान में चढ़ाई थी वो चोरी हो गई है, जिसके बाद से ये मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, दान की रकम में 8 करोड़ रुपये से अधिक का हेरफेर हुआ है। हालांकि टोटल कितनी राशि गायब हुई है इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही लगेगा। मामले में अब तक 2.98 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है और राज्य सरकार ने इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है।
पांच कर्मचारियों से चल रही पूछताछ
सूत्रों के मुताबिक लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रमाशंकर इस मामले के प्रमुख संदिग्धों के रूप में सामने आए हैं। ये सभी दान राशि की गिनती और उससे जुड़ी प्रक्रिया में तैनात थे। जांच में बरामद की गई रकम और अन्य साक्ष्यों के आधार पर इनकी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। सूत्रों का दावा है कि बरामदगी भी इन्हीं की निशानदेही पर हुई है।
किसी बड़ी साजिश का संकेत?
जांच के दौरान सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी रकम लंबे समय तक गायब होती रही और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। इसी वजह से जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस पूरे मामले के पीछे किसी प्रभावशाली व्यक्ति का हाथ रहा है। फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
ट्रस्ट की चुप्पी उठा रही सवाल
मामले के सामने आने के बाद से मंदिर ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की चुप्पी के कारण तरह- तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। सूत्रों का कहना है कि कुछ अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, लेकिन अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है।
टिन्नू के नाम की भी हो रही चर्चा
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट से जुड़े एक पदाधिकारी के करीबी माने जाने वाले टिन्नू का नाम भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि संदिग्धों में शामिल रमाशंकर उसका रिश्तेदार है। सूत्रों का दावा है कि मंदिर से जुड़े कई कार्यों में उसका हस्तक्षेप माना जाता रहा है। हालांकि उसके खिलाफ किसी तरह का कोई आधिकारिक आरोप या कार्रवाई सामने नहीं आई है।
पुलिस और प्रशासन पर उठ रहे सवाल
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस मामले में कोई औपचारिक लिखित शिकायत नहीं मिली है। ऐसे में आधिकारिक स्तर पर कार्रवाई या पूछताछ की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके बावजूद सूत्रों का दावा है कि बरामदगी और जांच की प्रक्रिया में पुलिस की एक टीम सहयोग कर रही है।
खातों और संपत्तियों की हो रही जांच
जांच एजेंसियां संदिग्ध कर्मचारियों के बैंक खातों, संपत्तियों और अन्य वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, अवनीश के बैंक खाते से पांच लाख रुपये मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा कुछ जेवरात भी बरामद किए गए हैं। वहीं शनिवार को रुदौली क्षेत्र के मीनापुर ठकुरन फगौली गांव में कर्मचारी लवकुश के घर छापेमारी के दौरान 10 से 12 लाख रुपये नकद मिलने की बात कही जा रही है।
सरकार ने बनाई तीन सदस्यीय SIT
मामले को लेकर बढ़ते विवाद के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन कर दिया है। SIT में लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ जोन की पुलिस महानिरीक्षक किरन एस और विशेष वित्त सचिव नीलरतन को शामिल किया गया है। टीम को सात दिन में प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिन के भीतर अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
दान राशि में गबन का यह मामला धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर मुद्दा बना हुआ है। अब सभी की निगाहें SIT की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सकेगा कि हेरफेर की वास्तविक राशि कितनी है, इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क या साजिश काम कर रही थी।
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