Jet Fuel Price Hike: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू एयरलाइंस के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट फ्यूल की कीमत में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले के बाद हवाई यात्रा के खर्च पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, सरकार और तेल कंपनियों ने एयरलाइंस को राहत देने के लिए एक नई फिक्स्ड-रेट योजना भी शुरू की है।
एयरलाइंस के लिए शुरू हुई नई योजना
न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, तेल कंपनियों ने एयरलाइंस को एक वैकल्पिक व्यवस्था की पेशकश की है। इसके तहत एयरलाइंस अगले तीन वर्षों तक तय दर पर जेट फ्यूल खरीद सकती हैं। इस योजना को अपनाने वाली कंपनियों को करीब 115 रुपये प्रति लीटर की दर से ईंधन मिलेगा। वहीं, योजना से बाहर रहने वाली एयरलाइंस को बाजार आधारित कीमत चुकानी होगी, जो फिलहाल करीब 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है। इस योजना में शामिल होना पूरी तरह स्वैच्छिक रखा गया है।
कीमतों में उछाल के पीछे क्या वजह है?
पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में जेट फ्यूल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जानकारी के अनुसार, युद्ध शुरू होने से पहले जेट फ्यूल की कीमत करीब 60 रुपये प्रति लीटर थी, जो मई में बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई। इस बढ़ोतरी ने एयरलाइंस की परिचालन लागत पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया। वहीं, तेल विपणन कंपनियों को भी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ रहा था क्योंकि घरेलू स्तर पर कीमतों में पूरी बढ़ोतरी लागू नहीं की गई थी।
10,000 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी
बढ़ती कीमतों और बाजार में अस्थिरता को देखते हुए सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये की मूल्य स्थिरीकरण योजना को मंजूरी दी है। इस पहल का उद्देश्य ईंधन की कीमतों में होने वाले तेज उतार-चढ़ाव के प्रभाव को कम करना और विमानन क्षेत्र को स्थिरता प्रदान करना है।
टिकट कीमतों पर कितना असर पड़ेगा?
एविएशन टर्बाइन फ्यूल किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का लगभग 40% हिस्सा होता है। कई बार कीमतों में तेज बढ़ोतरी के दौरान इसका हिस्सा 60 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। ऐसे में ईंधन महंगा होने का सीधा असर एयरलाइंस की लागत पर पड़ता है। हालांकि, नई फिक्स्ड-रेट योजना के जरिए कंपनियों को अपने खर्च का बेहतर अनुमान लगाने में मदद मिलेगी, जिससे किराए में अचानक बढ़ोतरी की संभावना कम हो सकती है।
यात्रियों को मिल सकती है राहत
सरकार का कहना है कि यह कोई सब्सिडी योजना नहीं है, बल्कि कीमतों को स्थिर रखने के लिए बनाई गई अस्थायी व्यवस्था है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने पर सरकार तेल कंपनियों को ब्याज मुक्त सहायता उपलब्ध कराएगी और कीमतें घटने पर यह राशि वापस ली जाएगी। माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से ईंधन लागत का पूरा बोझ यात्रियों पर नहीं पड़ेगा और हवाई किराए में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी रह सकती है।
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