R Praggnanandhaa First Indian Win Norway Chess Championship: भारतीय शतरंज के युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंद ने नॉर्वे चेस 2026 का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। महज 20 साल के खिलाड़ी ने टूर्नामेंट के अंतिम राउंड में जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराकर चैंपियनशिप अपने नाम की है। इसके साथ ही वह नॉर्वे चेस का खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं।
हासिल की ऐतिहासिक उपलब्धि
ओस्लो में आयोजित इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में ग्रैंडमास्टर प्रज्ञानानंद ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दुनिया के कई बड़े खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया है। वर्ष 2013 में शुरू हुए नॉर्वे चेस के इतिहास में किसी भारतीय खिलाड़ी ने पहली बार ट्रॉफी पर कब्जा जमाया है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद और मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश भी अब तक यह खिताब नहीं जीत सके थे।
दुनिया के दिग्गजों के बीच चमके प्रज्ञानानंद
नॉर्वे चेस को दुनिया के सबसे मजबूत टूर्नामेंटों में गिना जाता है। इस बार प्रतियोगिता में विश्व नंबर-1 मैग्नस कार्लसन, मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश, अलीरेजा फिरोजा, वेस्ली सो और विंसेंट कीमर जैसे बड़े नाम शामिल थे। ऐसे कठिन मुकाबले में खिताब जीतना प्रज्ञानानंद की सफलता को और अधिक अहम बनाता है।
शानदार वापसी ने दिलाया खिताब
टूर्नामेंट के बीच में कुछ हार के कारण ग्रैंडमास्टर प्रज्ञानानंद की स्थिति कमजोर पड़ गई थी और उनके खिताब जीतने की संभावनाओं पर सवाल उठने लगे थे। हालांकि उन्होंने दबाव के बीच बेहतरीन वापसी की और लगातार जीत हासिल कर फिर से खुद को खिताबी दौड़ में शामिल कर लिया।
कार्लसन और गुकेश पर दर्ज की अहम जीत
ग्रैंडमास्टर प्रज्ञानानंद ने टूर्नामेंट के दौरान अलीरेजा फिरोजा, मैग्नस कार्लसन और डी. गुकेश के खिलाफ क्लासिकल मुकाबलों में जीत हासिल की। नौवें राउंड में गुकेश पर मिली जीत निर्णायक साबित हुई, जिसने उन्हें अंक तालिका में बड़े-बड़े खिलाड़ियों के करीब पहुंचा दिया और अंतिम राउंड को रोमांचक बना दिया।
कार्लसन के खिलाफ बनाया खास रिकॉर्ड
इस टूर्नामेंट में ग्रैंडमास्टर प्रज्ञानानंद ने विश्व नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल शतरंज में दो बार हराया। वह विश्वनाथन आनंद के बाद ऐसे दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए जिन्होंने एक ही टूर्नामेंट में कार्लसन को दो बार मात दी। इसके अलावा, 2026 में क्लासिकल मुकाबलों में कार्लसन को दो बार हराने वाले वह पहले खिलाड़ी भी बने।
अंतिम राउंड में पलटा पूरा समीकरण
आखिरी दौर से पहले प्रज्ञानानंद, वेस्ली सो और अलीरेजा फिरोजा खिताब की दौड़ में बने हुए थे। वेस्ली सो ने आर्मागेडन मुकाबले में फिरोजा को हराकर अपनी उम्मीदें जिंदा रखीं, लेकिन प्रज्ञानानंद ने विंसेंट कीमर के खिलाफ जीत दर्ज कर किसी भी गणित की जरूरत खत्म कर दी और सीधे चैंपियन बन गए।
कार्लसन चौथे और गुकेश अंतिम स्थान पर रहे
टूर्नामेंट के अंतिम दौर में मैग्नस कार्लसन ने सफेद मोहरों से खेलते हुए डी. गुकेश को क्लासिकल मुकाबले में हराया। इस जीत से उन्हें तीन अंक मिले, लेकिन वह खिताब की दौड़ में वापसी नहीं कर सके। कार्लसन 13 अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहे। वहीं, डी. गुकेश का अभियान उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा और वह 8 अंकों के साथ छह खिलाड़ियों की लिस्ट में अंतिम स्थान पर रहे।
भारतीय शतरंज के लिए बड़ी उपलब्धि
ग्रैंडमास्टर प्रज्ञानानंद की यह जीत भारतीय शतरंज के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है। कम उम्र में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को पछाड़कर नॉर्वे चेस का खिताब जीतना उनकी प्रतिभा और निरंतर प्रगति का प्रमाण है। इस सफलता से न केवल उनकी वैश्विक पहचान और मजबूत हुई है, बल्कि भारतीय शतरंज को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई ऊंचाई मिली है।
Read More:
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसने वाला देश का पहला राज्य बना पंजाब – अरविंद केजरीवाल

