Malviya Nagar Fire: मालवीय नगर में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद दिल्ली सरकार और प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। हादसे के बाद हुई उच्च स्तरीय आपातकालीन समीक्षा बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना और गृह मंत्री आशीष सूद की मौजूदगी में हुई बैठक में राजधानी में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 30 दिनों का विशेष प्रवर्तन एवं रोकथाम अभियान शुरू करने का फैसला किया गया।
एक महीने तक चलेगा अभियान
दिल्ली सरकार के गृह विभाग को इस पूरे अभियान का नोडल विभाग बनाया गया है। सभी संबंधित विभागों के बीच तालमेल स्थापित कर कार्रवाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी इसी विभाग के पास होगी। मुख्य सचिव और दिल्ली पुलिस आयुक्त अगले एक महीने तक अभियान की निगरानी करेंगे। प्रशासन ने साफ किया है कि नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
मालवीय नगर हादसे की जांच के लिए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश जारी किए गए हैं। यह जांच संबंधित जिले के जिला मजिस्ट्रेट की निगरानी में होगी। जांच का उद्देश्य हादसे के कारणों का पता लगाना और जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय करना है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
होटलों से कोचिंग संस्थानों तक होगी जांच
सरकार ने राजधानी के सभी होटल, लॉज, गेस्ट हाउस, नर्सिंग होम, कोचिंग सेंटर, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में फायर सेफ्टी नियमों की व्यापक जांच कराने का निर्णय लिया है। प्रशासन का मानना है कि सुरक्षा की अनदेखी ही ऐसे हादसों की वजह बनती है।
एसोसिएशनों को दी जाएगी चेतावनी
दिल्ली पुलिस, एमसीडी और पर्यटन विभाग संयुक्त रूप से होटल और संबंधित व्यावसायिक संगठनों के साथ बैठक करेंगे। इन बैठकों में संस्थानों को फायर सेफ्टी और लाइसेंस संबंधी नियमों का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य केवल कार्रवाई करना नहीं बल्कि नियमों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाना है।
अवैध कमरों पर सख्ती
होटलों और लॉज में निर्धारित क्षमता से अधिक बनाए गए या संचालित किए जा रहे अतिरिक्त कमरों को तुरंत बंद कराया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि क्षमता से अधिक संचालन सुरक्षा खतरे को बढ़ाता है और आपातकालीन परिस्थितियों में जान-माल के नुकसान की आशंका बढ़ जाती है।
संयुक्त टीम करेगी जमीनी कार्रवाई
ग्राउंड लेवल पर जांच और प्रवर्तन के लिए जिला मजिस्ट्रेट, डीसीपी, एमसीडी अधिकारियों और दिल्ली फायर सर्विस के अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाई गई है। यह टीम मौके पर जाकर निरीक्षण करेगी और नियमों का उल्लंघन मिलने पर तुरंत कार्रवाई करेगी।
15 दिन में दुरुस्त करने होंगे सुरक्षा इंतजाम
सभी व्यावसायिक परिसरों को अगले 15 दिनों के भीतर अपने फायर सेफ्टी उपकरण, पानी के टैंक और वाटर सप्लाई सिस्टम को पूरी तरह कार्यशील बनाने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही बृहस्पतिवार से इन इमारतों का सुरक्षा ऑडिट भी शुरू किया जाएगा।
नियम तोड़ने वालों पर सीलिंग और मुकदमा
सरकार ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा का उल्लंघन करने वाले संस्थानों को सील किया जाएगा और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होगी। प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा।
जनता भी बनेगी निगरानी का हिस्सा
नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों की जानकारी जुटाने के लिए दिल्ली फायर सर्विस एक सप्ताह के भीतर विशेष हेल्पलाइन नंबर और ईमेल जारी करेगी। नागरिक इन माध्यमों से शिकायत और फीडबैक दर्ज करा सकेंगे, जिससे प्रशासन को कार्रवाई में मदद मिलेगी।
फायर ब्रिगेड के रास्ते होंगे साफ
दिल्ली फायर सर्विस, पुलिस और जमीन की मालिक एजेंसियां संयुक्त सर्वे करेंगी। इसका उद्देश्य उन स्थानों की पहचान करना है जहां संकरी गलियों, अतिक्रमण या अन्य बाधाओं के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को पहुंचने में परेशानी होती है। जहां संभव होगा वहां अतिक्रमण हटाया जाएगा और अन्य जगहों पर जरुरी व्यवस्था की जाएगी।
डिजिटल जागरूकता अभियान भी शुरू
फायर सेफ्टी नियमों की जानकारी डिजिटल माध्यम से सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों तक पहुंचाई जाएगी। उन्हें अपने स्तर पर सुरक्षा उपकरणों और जल आपूर्ति व्यवस्था की जांच कर कमियों को दूर करने के लिए कहा गया है।
पीड़ितों को तुरंत राहत देने पर जोर
सरकार ने हादसे में घायल लोगों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मृतकों की पहचान को प्राथमिकता देते हुए डीएनए सैंपलिंग कराई जाएगी। प्रशासन पीड़ित परिवारों और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विदेशी दूतावासों को भी सूचित करेगा। अंतिम संस्कार, दफनाने या शवों को उनके स्थान तक पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन उठाएगा।
भविष्य में हादसे रोकने की तैयारी
दिल्ली सरकार का मानना है कि यह अभियान केवल मौजूदा हादसे की प्रतिक्रिया नहीं बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की दिशा में एक व्यापक पहल है। प्रशासनिक सख्ती, तकनीकी ऑडिट और जनभागीदारी के जरिए राजधानी में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
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