पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कई नए चेहरे सुर्खियों में हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की हो रही है वह है डॉ. इंद्रनील खान(Dr. Indranil Khan)। पेशे से कैंसर विशेषज्ञ और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने वाले डॉ. खान को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि मंत्री बनने के बाद उनकी उपलब्धियों से ज्यादा उनके नाम को लेकर लोगों की जिज्ञासा बढ़ गई है।
इंटरनेट पर बड़ी संख्या में लोग यह जानना चाह रहे हैं कि आखिर डॉ. इंद्रनील खान हिंदू हैं या मुसलमान। उनके नाम के साथ जुड़ा ‘खान’ उपनाम लोगों के बीच सवाल पैदा कर रहा है। लेकिन इसके पीछे की कहानी बंगाल के इतिहास और सामाजिक परंपराओं से जुड़ी हुई है।
धर्म से हिंदू हैं डॉ. इंद्रनील खान
डॉ. इंद्रनील खान बंगाली हिंदू परिवार से आते हैं। उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है और लंबे समय तक कैंसर रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्य किया है। राजनीति में आने से पहले भी वे सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी के चिकित्सा प्रकोष्ठ से जुड़े रहने के कारण संगठन में उनकी मजबूत पकड़ बनी। यही वजह रही कि पार्टी ने उन्हें चुनावी मैदान में उतारा और बाद में उनकी जीत को देखते हुए मंत्री पद की जिम्मेदारी भी सौंपी।
आखिर हिंदू परिवार में कैसे आया ‘खान’ सरनेम?
बंगाल की सामाजिक संरचना देश के अन्य हिस्सों से काफी अलग रही है। यहां कई ऐसे उपनाम मिलते हैं जो किसी एक धर्म तक सीमित नहीं हैं। ‘खान’ भी उन्हीं उपनामों में से एक है। इतिहासकारों के अनुसार, मध्यकाल में बंगाल में शासन करने वाले सुल्तानों, नवाबों और मुगल शासकों द्वारा कई हिंदू परिवारों को उनकी सेवाओं, बहादुरी और प्रशासनिक योगदान के लिए विशेष उपाधियां दी जाती थीं।
‘भारत की सांस्कृतिक विविधता कई बार ऐसी परंपराओं को जन्म देती है जो पहली नजर में लोगों को हैरान कर सकती हैं। पश्चिम बंगाल भी ऐसी ही ऐतिहासिक और सामाजिक विरासत का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यहां कई ऐसे उपनाम या सरनेम देखने को मिलते हैं जिन्हें केवल किसी एक धर्म या समुदाय से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। ‘खान’, ‘मजूमदार’, ‘मल्लिक’, ‘लश्कर’, ‘सरकार’ और ‘चौधरी’ जैसे कई उपनाम बंगाल में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के बीच समान रूप से प्रचलित हैं।
दर्ज की बड़ी ऐतिहासिक जीत
डॉ. इंद्रनील खान ने विधानसभा चुनाव में कोलकाता की चर्चित बेहला पश्चिम सीट से जीत हासिल की। यह क्षेत्र लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा था। लेकिन इस बार उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए TMC उम्मीदवार रत्ना चटर्जी को बड़े अंतर से पराजित किया।
उनकी इस जीत को भाजपा के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक सफलता माना गया। चुनावी प्रदर्शन, संगठन में सक्रियता और पेशेवर अनुभव को देखते हुए उन्हें मंत्रिमंडल में जगह दी गई।
नाम से नहीं, काम से बनी पहचान
डॉ. इंद्रनील खान का राजनीतिक सफर इस बात का उदाहरण है कि सार्वजनिक जीवन में पहचान केवल नाम या उपनाम से नहीं बल्कि कार्य और उपलब्धियों से बनती है। एक डॉक्टर से जनप्रतिनिधि और फिर मंत्री बनने तक की उनकी यात्रा लगातार मेहनत, जनसंपर्क और संगठनात्मक प्रतिबद्धता का परिणाम है। आज वे पश्चिम बंगाल की राजनीति के उन चेहरों में शामिल हैं जिन पर आने वाले वर्षों में सबकी नजरें बनी रहेंगी।