Israel Lebanon Conflict: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में 900 साल पुराने ब्यूफ़ोर्ट किले और उसके आस-पास की पहाड़ियों पर अपना कब्जा जमा लिया है। इजरायल ने इस रणनीतिक ठिकाने पर अपना और गोलानी ब्रिगेड का झंडा फहराया है। यह कब्जा तब किया गया है जब क्षेत्र में कूटनीतिक गतिविधियां भी जारी हैं और ईरान-अमेरिका के बीच कई मुद्दों पर बातचीत की चर्चा हो रही है।
44 साल बाद लौटी गोलानी ब्रिगेड
इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने इस कार्रवाई को बड़ी रणनीतिक सफलता बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के निर्देशों के तहत सेना ने लेबनान में अपने अभियान का विस्तार किया, लितानी नदी को पार किया और ब्यूफोर्ट रिज पर नियंत्रण स्थापित किया। काट्ज के अनुसार, 1982 की लड़ाई के 44 साल बाद गोलानी ब्रिगेड के सैनिक फिर उसी पहाड़ी पर पहुंचे हैं, जहां अब इजरायल और ब्रिगेड का झंडा फहराया गया है।
सामने आईं सैनिकों की तस्वीरें
इजरायली ब्रॉडकास्ट कॉर्प ने रविवार को सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कीं, जिनमें नबातियेह शहर के निकट स्थित ब्यूफोर्ट किले पर इजरायली सैनिक दिखाई दिए। इसके बाद इजरायली रक्षा बल (IDF) ने भी क्षेत्र में तैनात सैनिकों के फोटो और वीडियो जारी किए। इन तस्वीरों ने इस सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज कर दी है।
लितानी नदी के उत्तर तक अभियान
आईडीएफ के प्रवक्ता के अनुसार, इजरायली सेना अब लितानी नदी के उत्तर में भी हिज्बुल्लाह के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। सेना का दावा है कि इस दौरान कई अहम सैन्य उपलब्धियां हासिल की गई हैं और हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। इजरायल का कहना है कि उसका उद्देश्य उत्तरी सीमा की सुरक्षा को मजबूत करना है।
हिज्बुल्लाह को सख्त संदेश
रक्षा मंत्री काट्ज ने कहा कि यह कार्रवाई इजरायल के विरोधियों के लिए साफ संदेश है। उनके मुताबिक जो भी इजरायली नागरिकों और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा को चुनौती देगा, उसे अपने रणनीतिक ठिकानों से हाथ धोना पड़ेगा। उन्होंने यह भी बताया कि पूरे ऑपरेशन को बहुत गुपचुप तरीके से अंजाम दिया गया और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां अभी भी जारी हैं।
क्यों अहम है ब्यूफोर्ट किला?
दक्षिणी लेबनान की ऊंची पहाड़ी पर स्थित ब्यूफोर्ट किला लंबे समय से सैन्य दृष्टि से बेहद अहम माना जाता रहा है। इस स्थान से आसपास के बड़े भूभाग और गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। यही वजह है कि यह क्षेत्र वर्षों से इजरायल और उसके विरोधियों के बीच रणनीतिक महत्व का केंद्र बना हुआ है।
1982 से जुड़ा है इतिहास
लेबनान युद्ध के दौरान वर्ष 1982 में इजरायली सेना ने पहली बार इस किले पर कब्जा किया था। उस अभियान में गोलानी ब्रिगेड के छह सैनिक मारे गए थे। बाद में 1982 से 2000 तक दक्षिणी लेबनान के जिन इलाकों पर इजरायल का प्रभाव रहा, उनमें ब्यूफोर्ट भी शामिल था। वर्ष 2000 में इजरायल ने अपने सैनिकों को इस क्षेत्र से वापस बुला लिया था। यह किला 900 साल पुराना है।
26 साल बाद फिर कब्जा
करीब 26 साल बाद और 1982 की लड़ाई के 44 साल बाद इजरायली सेना का दोबारा इस किले पर झंडा फहराना प्रतीकात्मक और सैन्य दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है। इजरायल इसे अपनी सुरक्षा नीति और उत्तरी सीमा की मजबूती के लिए बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है, जबकि इस कदम से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
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