मध्य प्रदेश(Madhya Pradesh) के शिवपुरी शहर में एक आवारा कुत्ते के हमलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शहर के विभिन्न इलाकों में घूम रहे एक काले रंग के कुत्ते ने एक ही दिन में 60 से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बना लिया। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भय का माहौल है जबकि जिला अस्पताल में डॉग बाइट के मरीजों की संख्या अचानक बढ़ने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी दबाव देखने को मिला।
बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में लोग इस हमले में घायल हुए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुत्ता अचानक राह चलते लोगों पर झपट रहा था। कई बच्चे घरों के बाहर खेलते समय इसकी चपेट में आ गए जबकि कुछ लोगों पर बाजार और दुकानों के आसपास हमला हुआ। घटनाएं इतनी तेजी से हुईं कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
घर से बाहर निकलने में डर रहे लोग
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पूरे दिन कुत्ता अलग-अलग इलाकों में घूमता रहा और लगातार लोगों को काटता रहा। इसके चलते कई मोहल्लों में लोग घरों से बाहर निकलने में भी डर महसूस करने लगे। कुछ स्थानों पर लोगों ने खुद कुत्ते को पकड़ने की कोशिश की लेकिन वह हाथ नहीं आया।
घटना की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नगर पालिका प्रशासन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के परिवार तक इसका असर पहुंचा। नगर पालिका प्रभारी की पत्नी भी कुत्ते के हमले का शिकार हो गईं। इसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कुत्ते की तलाश और उसे पकड़ने के लिए विशेष टीमों को सक्रिय किया।
प्रशासन पर उठे सवाल
घटना के बाद जिला अस्पताल में घायलों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। सामान्य दिनों की तुलना में डॉग बाइट के मामलों में अचानक कई गुना वृद्धि दर्ज की गई। अस्पताल प्रशासन ने सभी पीड़ितों को आवश्यक चिकित्सा सहायता, एंटी-रेबीज इंजेक्शन और अन्य जरूरी उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, एक दिन में इतने अधिक डॉग बाइट मामलों का सामने आना असामान्य स्थिति है।
डॉक्टरों की टीम लगातार मरीजों की जांच और उपचार में जुटी रही ताकि किसी भी प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्या से बचा जा सके। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। नागरिकों का कहना है कि शहर में आवारा कुत्तों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है लेकिन इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते नियंत्रण अभियान चलाया गया होता तो इतनी बड़ी घटना को रोका जा सकता था।