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मर्चेंट नेवी का ‘कैप्टन’ निकला साइबर ठगों का आका, UP के युवाओं को विदेशों में बनाया साइबर गुलाम

एक 35 साल के पूर्व मर्चेंट नेवी अधिकारी को कथित तौर पर भारतीय नागरिकों को ज़्यादा सैलरी वाली नौकरियों का झांसा देकर साइबर गुलामी के लिए कंबोडिया और थाईलैंड भेजने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, इस रैकेट का खुलासा तब हुआ जब कुछ युवाओं ने दावा किया कि उनके साथ धोखा हुआ है और उन्हें साइबर स्कैम सेंटरों में फंसा लिया गया है।

आरोपी की पहचान हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के रहने वाले नागेश कुमार उर्फ ​​कैप्टन चौहान के रूप में हुई है। उसे चंडीगढ़ में गिरफ्तार किया गया और गुरुवार शाम को ट्रांजिट रिमांड पर आगरा लाया गया।

विदेश भेजने के नाम पर लाखों रुपये ऐंठता

खबरों के मुताबिक, यह गिरोह लोगों को विदेश भेजने के नाम पर उनसे लाखों रुपये ऐंठता था और उन्हें ज़्यादा सैलरी वाली नौकरियों का लालच देकर इन दो एशियाई देशों में भेज देता था।

कुमार जिसने अपनी नौकरी छोड़ दी थी और कथित तौर पर पिछले तीन सालों से इस रैकेट में शामिल था, आगरा और कानपुर जैसे UP के बड़े शहरों के युवाओं को निशाना बनाता था। वहां पहुंचने के बाद कथित तौर पर इन युवाओं को बंधक बना लिया जाता था और उनसे जबरन साइबर धोखाधड़ी और ऑनलाइन अपराध करवाए जाते थे।

भारतीय नागरिकों को बनाते थे निशाना 

एक रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ताओं ने पुलिस को इस स्कैम के बारे में बताया और यह भी बताया कि कैसे उन्हें कॉल सेंटरों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता था, जहां वे WhatsApp कॉल और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए भारतीय नागरिकों को निशाना बनाते थे।

शिकायत मिलने के बाद आगरा साइबर सेल ने जांच शुरू की और पाया कि कई भारतीय युवा इस रैकेट में फंसे हुए थे और उन पर ऑनलाइन धोखाधड़ी करने का दबाव डाला जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने कई जगहों पर छापेमारी की और हिमाचल प्रदेश के पालमपुर इलाके से नागेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया।

 

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