देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बार फिर विवादों(NEET Exam Cancelled) के घेरे में आ गई है। इस बार मामला कथित ‘गेस पेपर’ के जरिए प्रश्नों के लीक होने और बड़े स्तर पर छात्रों तक सामग्री पहुंचाने से जुड़ा बताया जा रहा है। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और जांच के केंद्र में सीकर निवासी राकेश मंडावरिया का नाम सामने आया है।
जांच एजेंसियों का दावा है कि राजस्थान के सीकर से शुरू हुआ यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है। करीब 22 लाख छात्रों द्वारा दी गई इस परीक्षा को लेकर अब अभिभावकों, छात्रों और कोचिंग संस्थानों के बीच चिंता का माहौल है। SOG यह पता लगाने में जुटी है कि कथित गेस पेपर महज संभावित सवालों का संग्रह था या फिर इसमें परीक्षा से जुड़े वास्तविक प्रश्न शामिल थे।
कौन है राकेश मंडावरिया?
सूत्रों के मुताबिक राकेश मंडावरिया सीकर के पिपराली रोड इलाके में एसके कंसल्टेंसी नाम से संस्थान चलाता है। जांच एजेंसियों को शक है कि इसी नेटवर्क के माध्यम से कथित प्रश्न बैंक छात्रों और कोचिंग सर्किल तक पहुंचाया गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अप्रैल महीने में ही यह सामग्री कुछ लोगों तक पहुंच चुकी थी। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि इसी दस्तावेज की PDF कॉपी अलग-अलग छात्रों और संस्थानों को भेजी गई। अब जांच इस दिशा में आगे बढ़ रही है कि आखिर यह सामग्री कहां से तैयार हुई और किन-किन लोगों तक पहुंची।
क्या है ‘गेस पेपर’ विवाद ?
राजस्थान पुलिस के एडीजी विशाल बंसल के अनुसार, जांच फिलहाल करीब 410 सवालों वाले एक गेस पेपर पर केंद्रित है। आरोप है कि इनमें से लगभग 120 सवाल वास्तविक परीक्षा के प्रश्नों से काफी मेल खाते थे। खासतौर पर बायोलॉजी और केमिस्ट्री के प्रश्नों में समानता देखी गई है।
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इस सामग्री से छात्रों को बड़े स्तर पर फायदा मिल सकता था। हालांकि अब तक पुलिस और NTA ने आधिकारिक तौर पर इसे पेपर लीक नहीं माना है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस गेस पेपर के नाम पर संगठित तरीके से धोखाधड़ी की गई थी।
अब तक पकड़े गए कितने लोग ?
इस मामले में अब तक 15 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। इनमें राजस्थान और उत्तराखंड के कई संदिग्ध शामिल बताए जा रहे हैं। सोमवार को जयपुर से मनीष नाम के एक व्यक्ति को भी हिरासत में लिया गया, जिसे जांच एजेंसियां इस नेटवर्क का अहम कड़ी मान रही हैं। पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि यह कथित सामग्री किन राज्यों तक पहुंची और इसके बदले कितनी रकम ली गई।
NTA ने क्या कहा?
विवाद बढ़ने के बाद National Testing Agency ने सफाई देते हुए कहा कि परीक्षा पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित कराई गई थी। एजेंसी के अनुसार प्रश्न पत्र GPS ट्रैकिंग वाले वाहनों के जरिए परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए गए थे और उन पर विशेष वॉटरमार्क भी लगाए गए थे।
NTA ने यह भी बताया कि परीक्षा केंद्रों पर AI आधारित CCTV निगरानी, बायोमेट्रिक जांच और 5G जैमर जैसी व्यवस्थाएं की गई थीं। एजेंसी के मुताबिक 7 मई को कथित गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद अगले ही दिन मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दिया गया था।