Mother’s Day Special : मां केवल जन्म देने वाली नहीं होती वह बच्चे के व्यक्तित्व की पहली शिल्पकार भी होती है। वही पहली सीख देती है, वही पहला डर दूर करती है और वही बच्चे के भीतर साहस का पहला बीज बोती है। जीवन के शुरुआती कदम मां की उंगली थामकर ही चलते हैं। इसलिए यह कहना गलत नहीं कि हर महान व्यक्तित्व की नींव किसी न किसी मां के संस्कारों में छिपी होती है। मदर्स डे के मौके पर यह समझना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि इतिहास में जितने भी महान लोग हुए उनके पीछे किसी न किसी मां की दृढ़ता, संवेदना और मूल्य-शिक्षा रही है। आइए ऐसी ही कुछ प्रेरक माताओं को समझें जिन्होंने अपने बेटों को साधारण नहीं रहने दिया बल्कि उन्हें असाधारण बना दिया।
1. जीजाबाई – शिवाजी महाराज की प्रेरणा
जीजाबाई ने अपने पुत्र शिवाजी को बचपन से ही धर्म, न्याय और स्वाभिमान की कहानियों से जोड़ा। रामायण-महाभारत के प्रसंगों के जरिए उन्होंने उनके भीतर अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस जगाया। उनका उद्देश्य केवल राजा बनाना नहीं था बल्कि एक ऐसा शासक तैयार करना था जो जनता को अपना परिवार समझे।

2. पुतलीबाई – महात्मा गांधी की संस्कारदाता
गांधी जी की मां पुतलीबाई बेहद सरल, धार्मिक और अनुशासित जीवन जीती थीं। उनके व्रत, प्रार्थना और सेवा भाव का गहरा असर मोहनदास पर पड़ा। सत्य, अहिंसा और संयम जैसे मूल्यों की पहली शिक्षा उन्हें घर से ही मिली जिसने आगे चलकर उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिलाई।

3. जयवंताबाई – महाराणा प्रताप की शक्ति
जयवंताबाई ने अपने पुत्र को सिखाया कि आत्मसम्मान किसी भी संपत्ति से बड़ा होता है। उन्होंने प्रताप को यह समझ दी कि स्वतंत्रता के बिना जीवन अधूरा है। यही विचार महाराणा प्रताप के जीवन का आधार बने जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी झुकना स्वीकार नहीं किया।

4. भुवनेश्वरी देवी – विवेकानंद की दिशा
स्वामी विवेकानंद की मां भुवनेश्वरी देवी ने उन्हें साहस और आत्मविश्वास से भर दिया। बचपन में उनकी जिज्ञासा को दबाने के बजाय उन्होंने उसे सही दिशा दी। धार्मिक कहानियों और नैतिक शिक्षा ने उनके व्यक्तित्व को गहराई दी।

5.रामदुलारी देवी – लाल बहादुर शास्त्री की सादगी की जननी
शास्त्री जी की मां ने कठिन परिस्थितियों में भी ईमानदारी और मेहनत का रास्ता नहीं छोड़ा। गरीबी के बीच भी उन्होंने अपने बच्चों को सच्चाई और सादगी का पाठ पढ़ाया जो आगे चलकर शास्त्री जी के व्यक्तित्व की पहचान बना।
6. मूलमती – रामप्रसाद बिस्मिल की हिम्मत
मूलमती ने अपने पुत्र को किताबों और विचारों से समृद्ध किया। उन्होंने चरित्र निर्माण को सबसे बड़ी पूंजी माना। जब देशभक्ति की राह कठिन हुई तब भी उन्होंने अपने बेटे के संकल्प को टूटने नहीं दिया।

7. विद्यावती – भगत सिंह की प्रेरक शक्ति
भगत सिंह की मां विद्यावती ने देशभक्ति का वातावरण घर में ही तैयार किया। उन्होंने अपने बेटे को अन्याय के खिलाफ खड़े होने की हिम्मत दी। उनका सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने डर के बजाय साहस को बढ़ावा दिया।

8. प्रभावती देवी – सुभाषचंद्र बोस की आधारशिला
नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मां प्रभावती देवी ने उन्हें अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का महत्व सिखाया। घर का संस्कारी वातावरण ही उनके भीतर देश के प्रति समर्पण की भावना का कारण बना।

9. माता त्रिप्ता – गुरु नानक देव जी की ममता
माता त्रिप्ता ने अपने पुत्र नानक की अलग सोच को समझा और उसे कभी दबाया नहीं। उनका प्रेम और धैर्य ही वह आधार बना जिसके चलते गुरु नानक ने समानता, प्रेम और सत्य का संदेश दुनिया को दिया।


