सुप्रीम कोर्ट ने अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में प्रवेश दिलाने के आरोप में गिरफ्तार एक व्यक्ति को जमानत दे दी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि केवल सीमा पार आवाजाही के आधार पर किसी व्यक्ति को आतंकी संगठन से जुड़ा नहीं माना जा सकता। सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ मामलों में सीमा पार गतिविधियां अवैध उद्देश्यों से जुड़ी हो सकती हैं, लेकिन हर ऐसी गतिविधि को आतंकवाद से जोड़ना सही नहीं होगा। अदालत ने यह भी कहा कि जांच में आरोपी के किसी आतंकी संगठन से जुड़े होने के प्रमाण नहीं मिले हैं।
2023 में हुई थी गिरफ्तारी
याचिकाकर्ता पर आरोप है कि वह बांग्लादेश और म्यांमार से लोगों की अवैध तरीके से भारत में एंट्री कराने वाले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह गिरोह मानव तस्करी और अवैध घुसपैठ से जुड़ी गतिविधियों में शामिल था। आरोपी को 7 नवंबर 2023 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में था। अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी माना कि आरोपी पिछले 10 वर्षों से बेंगलुरु में रह रहा है।
कोर्ट ने जमानत के साथ लगाईं कई शर्तें
मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने कहा कि आरोपी को जमानत दी जाएगी, लेकिन उसकी गतिविधियों पर निगरानी रखी जाएगी। अदालत ने साफ कहा है कि आरोपी का भारत में कोई स्थायी निवास नहीं है, इसलिए उसे कड़ी शर्तों के साथ राहत दी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि आरोपी को अपना वर्तमान पता स्थानीय एनआईए कार्यालय में जमा कराना होगा। राष्ट्रीय जांच एजेंसी उस पते का सत्यापन करेगी और मकान मालिक का बयान भी दर्ज करेगी। इसके अलावा आरोपी को हर शनिवार NIA कार्यालय में उपस्थित होना होगा। हालांकि, बेंगलुरु स्थित NIA के वरिष्ठ अधिकारी जरूरत पड़ने पर इस शर्त में छूट दे सकते हैं।
अवैध घुसपैठ पर एजेंसियों की सख्ती जारी
देश में अवैध घुसपैठ और मानव तस्करी से जुड़े मामलों पर जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। केंद्र सरकार ने ऐसे मामलों की जांच NIA को सौंपी है। एजेंसियां उन नेटवर्क्स की पहचान में जुटी हैं, जो अवैध रूप से लोगों को भारत में प्रवेश दिलाने और उन्हें फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने में मदद करते हैं।
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