आज़ादी के बाद पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने जा रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 साल के शासन का किला ढह गया है, और BJP ने ज़बरदस्त बहुमत हासिल किया है। पूर्व क्रिकेटर और अब विधायक अशोक डिंडा ने भी इस ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाई है।
पूर्वी मिदनापुर ज़िले की मोयना विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते हुए अशोक डिंडा ने TMC के अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी चंदन मंडल को लगभग 15,000 वोटों के अंतर से हराया। इसके साथ ही उन्होंने लगातार दूसरी बार विधायक चुने जाने का रिकॉर्ड बनाया है। पिछले चुनाव में उन्होंने इसी सीट से TMC के संग्राम कुमार डोलाई को 1,260 वोटों के अंतर से हराया था।
खेल से राजनीति तक का सफर
अशोक डिंडा का जन्म 25 मार्च 1984 को मेदनीपुर, कोलकाता में हुआ था। उन्होंने 2009 में श्रीलंका के खिलाफ टी-20 मैच से इंटरनेशनल डेब्यू किया और मई 2010 में वनडे में भी खेले। हालांकि उनका इंटरनेशनल करियर सीमित रहा, लेकिन उन्होंने 116 प्रथम श्रेणी और 98 लिस्ट ए मैचों में 420 और 151 विकेट लिए।
बंगाल क्रिकेट का बड़ा नाम बनने के बाद अशोक डिंडा ने राजनीतिक मैदान में भी अपनी पहचान बनाई। नाइचनपुर गांव से कोलकाता क्लब तक उनका सफर और 2005 में बंगाल के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण उन्हें स्थानीय युवा और खेल प्रेमियों में लोकप्रिय बनाता है। IPL में भी उन्होंने कोलकाता नाइटराइडर्स, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और राइजिंग पुणे सुपरजायंट्स की ओर से खेलते हुए 78 मैचों में 68 विकेट लिए।
बीजेपी में डिंडा की अहमियत
बीजेपी को बंगाल में मजबूती के लिए ऐसे चेहरों की जरूरत थी, जो जनता को जोड़ सकें। अशोक डिंडा को टिकट दिया गया और उनका यह दांव काम आया। अब लगातार दूसरी बार विधायक बनने के बाद यह साफ है कि क्रिकेट से राजनीति तक डिंडा का सफर सफल रहा है।
उनकी जीत ने बीजेपी को पश्चिम बंगाल में मजबूत आधार दिया और टीएमसी के लंबे शासन का अंत किया। बंगाल की राजनीति अब नए चेहरे और नए समीकरणों के साथ बदल रही है।
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