West Bengal Re-polling Election: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित डायमंड हार्बर और मगराहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों के 15 मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान कराया जा रहा है। इन सभी बूथों पर सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक वोटिंग होगी। इनमें से 11 मतदान केंद्र मगराहाट पश्चिम और 4 डायमंड हार्बर में स्थित हैं।
EVM से छेड़छाड़ के आरोप
यह फैसला इलेक्शन कमीशन ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा लगाए गए ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोपों को ध्यान में रखते हुए लिया है। पार्टी ने दावा किया था कि कुछ मतदान केंद्रों पर मशीनों के साथ छेड़छाड़ की गई, जिससे मतदान प्रक्रिया प्रभावित हुई।
फलता में सामने आया विवाद
सबसे बड़ा विवाद फलता इलाके से सामने आया, जहां आरोप लगाया गया कि ईवीएम पर कमल के फूल (BJP का चुनाव चिन्ह) वाले बटन को टेप से ढक दिया गया था। इस घटना से जुड़े फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया।
मतदाताओं ने भी की थीं शिकायतें
इस मामले में मतदाताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी शिकायत दर्ज कराई। शिकायतों में ईवीएम में गड़बड़ी, बूथ कैप्चरिंग और मतदान में धांधली जैसे गंभीर आरोप शामिल थे। इन शिकायतों के आधार पर चुनाव आयोग ने जांच शुरू की और प्रभावित बूथों पर पुनर्मतदान का फैसला लिया। सूत्रों के अनुसार, फलता विधानसभा क्षेत्र के करीब 30 अन्य बूथों पर भी दोबारा मतदान कराया जा सकता है। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय जिला निर्वाचन अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।
कानूनी प्रावधान के तहत कार्रवाई
चुनाव आयोग ने इन मतदान केंद्रों पर 29 अप्रैल को हुए मतदान को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 58(2) के तहत रद्द कर दिया है। यह प्रावधान आयोग को यह अधिकार देता है कि यदि किसी बूथ पर गंभीर गड़बड़ी या प्रक्रिया का उल्लंघन होता है, तो वह वहां मतदान निरस्त कर दोबारा चुनाव करा सकता है।
चुनाव के दौरान बढ़ा विवाद
29 अप्रैल को हुए दूसरे चरण के मतदान के दौरान राज्य में काफी हंगामा देखने को मिला। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि जानबूझकर उनके उम्मीदवारों के नाम के सामने टेप लगाकर मतदाताओं को भ्रमित किया गया। कुछ वीडियो में बीजेपी और सीपीएम उम्मीदवारों के नाम के पास टेप लगे होने के दृश्य भी सामने आए। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कहा कि जहां भी गड़बड़ी साबित होगी, वहां पुनर्मतदान कराया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता के प्रति आयोग की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है।
जांच में क्या आया सामने?
प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि मतदान शुरू होने से पहले या मॉक पोल के दौरान किसी गड़बड़ी के संकेत नहीं मिले थे। इससे यह संभावना जताई जा रही है कि कथित छेड़छाड़ मतदान के दौरान ही हुई होगी।
EVM से छेड़छाड़ है गंभीर अपराध
चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार, ईवीएम के बटन पर टेप, स्याही या कोई अन्य पदार्थ लगाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इसे चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप माना जाता है और इसके लिए सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। इस बीच, राज्य में हुए दोनों चरणों के मतदान में कुल 92.93 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो आजादी के बाद पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक है। पहले चरण में 23 अप्रैल को 93.19 प्रतिशत और दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 92.67 प्रतिशत मतदान हुआ था।
Read More:

