संगम नगरी प्रयागराज के सिविल लाइंस स्थित केनरा बैंक शाखा में एक बड़े गोल्ड लोन घोटाले का मामला सामने आया है। जांच में पता चला कि कई लोगों ने नकली सोना गिरवी रखकर लाखों रुपये का लोन लिया। कुल 18 खातों में अनियमितता पाई गई, जिसमें 16 लोगों ने नकली सोना रखकर 57,19,800 रुपये का लोन लिया, जो समय के साथ बढ़कर 64,01,990 रुपये हो गया।
एफआईआर और बैंक की कार्रवाई
बैंक के सहायक महाप्रबंधक एवं क्षेत्रीय प्रमुख पंकज वर्मा ने इस मामले में सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज कराई। एफआईआर जुलाई 2025 में दी गई थी, जबकि पुलिस ने जांच के बाद 10 अप्रैल 2026 को आधिकारिक मामला दर्ज किया।
संगठित धोखाधड़ी का खुलासा
जांच में यह भी सामने आया कि यह धोखाधड़ी एक बड़े संगठित सिंडिकेट द्वारा अंजाम दी गई। लोन स्वर्ण परीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर स्वीकृत किए गए थे। विष्णु शर्मा और कौशल किशोर वर्मा द्वारा दोबारा परीक्षण में गिरवी रखा सोना नकली पाया गया।
आरोपी और कानूनी प्रावधान
एफआईआर में 16 नामजद और अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। प्रमुख आरोपियों में विष्णु वर्मा, कौशल किशोर वर्मा, पलटू, महेश प्रताप सिंह, श्रीश कुमार, अजय कुमार, मोहम्मद अरमान, विकास कुमार, रवि कुमार, मनोज कुमार, रंजना यादव, फैज खान, कुलदीप कुमार दुबे, आलोक केसरवानी, कार्तिकेय कुमार कौशिक और मृत्युंजय सिंह शामिल हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर पूरे गिरोह की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।
बैंक और सुरक्षा प्रक्रिया
बैंक द्वारा लोन मंजूरी के दौरान हर तिमाही गिरवी सोने की दोबारा जांच कराई जाती है। इस घोटाले से बैंक अधिकारियों में हड़कंप मच गया है और जांच के दौरान अन्य जिलों के बैंकों में हुई इसी तरह की धोखाधड़ी के संकेत भी मिले हैं। इस खुलासे ने बैंकिंग क्षेत्र और जनता के बीच सुरक्षा और विश्वास पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और बैंक अधिकारी मिलकर पूरे गिरोह को सजा दिलाने के लिए जांच में जुटे हैं।
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