US Iran Peace Talks: पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता के विफल होते ही वैश्विक तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। वार्ता टूटने के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप का सख्त बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने ईरान को ‘पाषाण युग में भेजने’ की चेतावनी दी है। इस बयान के बाद मध्य पूर्व में हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ट्रंप ने की नाराजगी जाहिर
वार्ता के नतीजे सामने आने के बाद ट्रंप ने नाराजगी जाहिर करते हुए अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक आर्टिकल भी शेयर किया। इससे पहले भी वह साफ कर चुके हैं कि ‘चाहे डील हो या न हो, इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता, हम पहले ही जीत चुके हैं।’ उनके इस रुख से यह संकेत मिल रहा है कि अमेरिका अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में है।
ईरान को घेरने की रणनीति तेज
साझा किए गए आर्टिकल में यह संकेत दिया गया है कि वार्ता असफल होने की स्थिति में अमेरिका ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर सकता है। इसमें कहा गया है कि अगर ईरान अंतिम प्रस्ताव को ठुकराता है, तो वॉशिंगटन के पास कई विकल्प मौजूद हैं। इनमें आर्थिक प्रतिबंधों को और सख्त करना और वेनेजुएला की तरह ईरान की आर्थिक घेराबंदी शामिल हो सकती है। डोनॉल्ड ट्रंप पहले भी यह कह चुके हैं कि जरूरत पड़ी तो ईरान को “स्टोन एज” में वापस भेज दिया जाएगा। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है और इसे संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ेगा दबाव
Lexington Institute की सुरक्षा विशेषज्ञ Rebecca Grant के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना के लिए होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण स्थापित करना अब आसान हो गया है। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों में करीब 10 जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई है, जिनमें एक रूसी टैंकर भी शामिल है। रेबेका ग्रांट ने यह भी कहा कि यदि ईरान अपने रुख पर कायम रहता है, तो अमेरिकी नौसेना इस क्षेत्र में निगरानी और बढ़ा सकती है। ऐसे में खर्ग आइलैंड या ओमान के पास के संकरे समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को अमेरिकी अनुमति की आवश्यकता पड़ सकती है।
तनाव बढ़ने के संकेत
इस्लामाबाद में हुई वार्ता के विफल होने के बाद दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी और साफ नजर आ रही है। जहां ईरान पहले ही बातचीत से पीछे हटने के संकेत दे चुका है, वहीं अमेरिका अब दबाव की रणनीति अपनाने की ओर बढ़ता दिख रहा है। मौजूदा हालात को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला, तो मध्य पूर्व में तनाव फिर से खुले टकराव में बदल सकता है।
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