Jammu & Kashmir Terror Module: जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक बड़े अंतर-राज्यीय आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में 16 साल से भारत में छिपे दो पाकिस्तानी आतंकवादी अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरेरा और उसका साथी उस्मानभी पकड़े गए हैं। इसके अलावा तीन स्थानीय मददगारों (ओवर ग्राउंड वर्कर्स) को भी भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद के साथ गिरफ्तार किया गया है।
पंजाब में संयुक्त ऑपरेशन
अधिकारियों के अनुसार, खुफिया इनपुट और तकनीकी निगरानी के आधार पर 28 मार्च को पंजाब के मालेरकोटला में जम्मू-कश्मीर पुलिस और पंजाब पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाया। इस दौरान दोनों पाकिस्तानी आतंकियों को दबोचा गया, जबकि जमील नाम के एक स्थानीय व्यक्ति को उन्हें पनाह देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इसके बाद पूछताछ के लिए इन्हें श्रीनगर स्थित स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को सौंपा गया, जहां से पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।
करीब 16 साल पहले भारत में घुसे थे ये आतंकी
जांच में सामने आया है कि ये आतंकी करीब 16 साल पहले भारत में घुसे थे और लंबे समय से जम्मू-कश्मीर और पंजाब क्षेत्र में सक्रिय थे। उन्होंने घाटी में लगभग 40 विदेशी आतंकियों को हैंडल किया, जिनमें से ज्यादातर सुरक्षाबलों के ऑपरेशन में मारे जा चुके हैं। साथ ही, नेटवर्क की मदद से कुछ आतंकी फर्जी दस्तावेजों के जरिए विदेश जाने में भी सफल रहे।
श्रीनगर में भारी हथियार बरामद
पाकिस्तानी आतंकियों से मिली जानकारी के आधार पर श्रीनगर में छापेमारी कर तीन स्थानीय मददगारों को गिरफ्तार किया गया। इनमें नकीब अहमद भट, आदिल राशिद भट और गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ मामा शामिल हैं। इनके पास से AK-47 राइफलें, मैगजीन, पिस्तौल, ग्रेनेड और बड़ी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि ये लोग आतंकियों को पनाह, रसद और अन्य सहायता उपलब्ध करा रहे थे। इस मामले में ज़कूरा पुलिस स्टेशन में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), आर्म्स एक्ट और विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
कई राज्यों तक फैले तार
जांच में यह भी सामने आया है कि इस आतंकी नेटवर्क के तार राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों तक जुड़े हुए हैं। पुलिस ने इन राज्यों में कुल 19 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया है। शुरुआती जांच से संकेत मिला है कि यह एक संगठित नेटवर्क था, जो आतंकियों के आवागमन, पनाह और फंडिंग का काम कर रहा था। सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए आगे की कार्रवाई में जुटी हैं। इस सिलसिले में शाजिया नाम की एक महिला और श्रीनगर के खालिद मलिक की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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