US-Iran War: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष लगातार खतरनाक होता जा रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हमले तेज हो चुके हैं और अब अमेरिका ने तेहरान के खिलाफ अपनी सबसे घातक क्रूज मिसाइल JASSM-ER को तैनात करने की तैयारी शुरू कर दी है। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है।
रडार को चकमा देकर दूर से हमला करने में सक्षम
‘JASSM-ER’ मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्टील्थ क्षमता है, जो दुश्मन के रडार को धोखा देने में सक्षम बनाती है। यह मिसाइल 600 मील से अधिक दूरी से सटीक निशाना साध सकती है और पायलट को खतरे में डाले बिना दुश्मन के इलाके में गहराई तक हमला कर सकती है।
हजारों मिसाइलों का इस्तेमाल
सूत्रों के अनुसार, जंग शुरू होने के बाद चार हफ्तों के भीतर अमेरिका 1000 से ज्यादा ‘JASSM-ER’ मिसाइलों का इस्तेमाल कर चुका है। एक मिसाइल की कीमत लगभग 15 लाख डॉलर यानी करीब 12.5 करोड़ रुपये बताई जाती है, जिससे इस युद्ध की आर्थिक लागत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
तेजी से घट रहा अमेरिकी मिसाइल भंडार
लगातार हमलों के कारण अमेरिका के मिसाइल स्टॉक में बड़ी गिरावट आई है। पहले जहां इनकी संख्या करीब 2300 थी, वहीं अब दोबारा तैनाती के बाद केवल 425 मिसाइलें ही बचने की संभावना है। मौजूदा उत्पादन दर को देखते हुए इस भंडार को फिर से भरने में कई साल लग सकते हैं।
रक्षा प्रणाली पर भी बढ़ा दबाव
हमले ही नहीं, बल्कि बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली मिसाइलों की भी कमी सामने आ रही है। ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाव के लिए Patriot Missile System और THAAD जैसी इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी जरूरत पड़ रही है, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बढ़ा है।
ईरान का पलटवार
अमेरिका की बढ़ती सैन्य कार्रवाई के बीच ईरान भी जवाबी हमले कर रहा है। हाल ही में F-15E Strike Eagle फाइटर जेट को मार गिराया गया। इसके अलावा एक A-10 Thunderbolt II जेट और रेस्क्यू के लिए भेजे गए हेलीकॉप्टर भी हमले की चपेट में आए। ईरान ने 12 से अधिक MQ-9 Reaper ड्रोन को भी नष्ट करने का दावा किया है।
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